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Posted on October 26, 2011 at 6:00 AM

श्री यन्त्र इस यन्त्र को धन वृद्धि, धन प्राप्ति, क़र्ज़ से सम्बंधित धन पाने के लिए उपयोग में लाया जाता है | इस यन्त्र की अचल प्रतिष्ठा होती है इस यन्त्र को व्यापार वृद्धि में रखा जाता है तथा जीवन भर लक्ष्मी के लिए दुखी नहीं होना पड़ता |

कुबेर यन्त्र :-

इस यन्त्र की स्थापना के पश्चात दरिद्रता का नाश होकर धन व यश की प्राप्ति होती है स्वर्ण लाभ, रत्ना लाभ, गड़े हुए धन का लाभ एवं पैतृक सम्पति का लाभ चाहने वालो के लिए कुबेर यन्त्र अत्यंत सफलता दायक है | यह अनुभूत परीक्षित प्रयोग है इस यन्त्र की अचल प्रतिष्ठा होती है |

महालक्ष्मी यन्त्र

इस यन्त्र की चल या अचल दोनों तरह से प्रतिष्ठा की जाती है रंक को राजा बनाने का सामर्थ्य है इसमें | सिद्ध होने पर यह यन्त्र व्यापार वृद्धि दारिद्र्य नाश करने व ऐश्वर्य प्राप्त करने में आश्चर्य जनक रूप से काम करता है | इस अभिमंत्रित यन्त्र का पूजन करने से माता लक्ष्मी वर्ष प्रयन्त उस स्थान में निवास करती है तथा अपने भक्तगणों को अनुग्रहित करती है |

 

 

 

 

्मां महालक्ष्मी 

 !! श्रीमहालक्ष्मी पूजन !!

पुजनसामग्री-घर से- दुध,दही,घी(देशी गाय का हो तो अति उत्तम),शहद,गंगाजल,आम्रपत्र,बिल्व पत्र,,दुर्वांकुर,फुल,फल,लोटा,थाली,शंख,घन्टी,पीला चावल,शुध्द जल. 

मार्केट से-श्री यन्त्र,कुबेर यन्त्र,महालक्ष्मी यन्त्र,महाकाली का चित्र,हल्दी गांठ-९,पुजा सुपारी-११,जनेऊ-४,सिन्दुर,गुलाल,मौली धागा,इत्र(गुलाब,चन्दन,मोगरा),कमल का फुल-३,कमल गट्टा,रितुफल,नारियल-४,मिष्ठान,ताम्बुल(जो पान की पत्ती आप सेवन करते है),चन्दन,बंदन.धान का लावा,तिल का तेल /सरसों के तैल

इन सामग्रियो की व्यवस्था करके पुजन प्रारंभ करे! 

पुजन विधि-सर्व प्रथम शुध्द होकर पश्चिमाभिमुख(क्योकि महालक्ष्मी कि रात्रि कालीन पुजा पश्चिमाभिमुख हो कर हि की जाती है)  हो कर बैठ जाये फिर सर्वप्रथम पवित्री करण करे !

लोटे में जल लेकर उसमें थोडा सा गंगा जल मिला कर अपनें ऊपर छिडके तथा ये भावना करे कि हम पवित्र हो रहे है!

Diwali दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त Muhurta में घर में या दुकान में, पूजा घर के सम्मुख चौकी बिछाकर उस पर लाल वस्त्रबिछाकरलक्ष्मी-गणेश की मुर्ति या चित्र स्थापित करें तथा चित्र को पुष्पमाला पहनाएं। मुर्तिमयी श्रीमहालक्ष्मीजी के पास ही किसी पवित्र पात्रमें केसरयुक्त चन्दनसे अष्टदल कमल बनाकर उसपर द्रव्य-लछ्मी (रुपयों) को भी स्थापित करके एक साथ ही दोनोंकी पूजा करनी चाहिये। पूजन-सामग्री को यथास्थान रख ले। ।इसके पश्चात धूप, अगरबती और ५ दीप (5 deepak) शुध्द घी के और अन्य दीप तिल का तेल /सरसों के तैल (musturd oil) से प्रज्वलित करें। जल से भरा कलश Kalash भी चौकी पर रखें। कलश में मौली बांधकर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करें। तत्पश्चात श्री गणेश जी को, फिर उसके बादलक्ष्मी जी को तिलक करें और पुष्प अर्पित करें। इसके पश्चात हाथ में पुष्प, अक्षत, सुपारी, सिक्का और जल लेकर संकल्प sankalp करें।

संकल्प 

मैं (अपना नाम बोलें), सुपुत्र श्री (पिता का नाम बोलें), जाति (अपनी जाति बोलें), गोत्र (गोत्र बोलें), पता (अपना पूरा पता बोलें) अपने परिजनो के साथ जीवन को समृध्दि से परिपूर्ण करने वाली माता महालक्ष्मी (MahaLakshmi) की कृपा प्राप्त करने के लिये कार्तिक कृष्ण पक्छ की अमावस्या के दिन महालक्ष्मी पूजन कर रहा हूं। हे मां, कृपया मुझे धन, समृध्दि और ऐश्वर्य देने की कृपा करें। मेरे इस पूजन में स्थान देवता, नगर देवता, इष्ट देवता कुल देवता और गुरु देवता सहायक हों तथा मुझें सफलता प्रदान करें।

यह संकल्प पढकर हाथ में लिया हुआ जल, पुष्प और अक्षत आदि श्री गणेश-लक्ष्मी (Shree Ganesha-Laxmi) के समीप छोड दें।

इसके बाद एक एक कर के गणेशजी (Ganesha), मां लक्ष्मी (Mata Laxmi), मां सरस्वती (Accounts Books/Register/Baheekhaata), मां काली (Ink Pot Poojan ), धनाधीश कुबेर Lord Kuber(Tijori/Galla), तुला मान की पूजा करें। यथाशक्ती भेंट, नैवैद्य, मुद्रा,   आदि अर्पित करें।

दीपमालिका पूजन

किसी पात्रमें 11, 21 या उससे अधिक दीपों को प्रज्वलित कर महा  लक्ष्मी MahaLakshmi के समीप रखकर उस दीप-ज्योतिका “ओम दीपावल्यै नमः” इस नाम मंत्रसे गन्धादि उपचारोंद्वारा पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करे-

त्वं ज्योतिस्तवं रविश्चन्दरो विधुदग्निश्च तारकाः |

सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः ||

Deepamaalika दीपमालिकाओं का पूजन कर अपने आचार के अनुसार संतरा, ईख, पानीफल, धान का लावा इत्यादि पदार्थ चढाये। धानका लावा (खील) गणेश Ganesha, महा लक्ष्मी MahaLaxmi तथा अन्य सभी देवी देवताओं को भी अर्पित करे। अन्तमें अन्य सभी दीपकों को प्रज्वलित कर सम्पूर्ण गृह को अलंकृत करे। 

हवन विधि 

श्री सुक्त 

!!श्री गणेशाय नमः!!

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । 

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो ममावह ।1।

 

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । 

यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।2।

 

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम् 

श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ।3।

 

कांसोस्मि तां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।

पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ।4।

 

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलंतीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् । 

तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।5।

 

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः ।

तस्य फलानि तपसानुदन्तुमायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।6।

 

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह ।

प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।7।

 

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।

अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुदमे गृहात् ।8।

 

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् । 

ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ।9।

 

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। 

पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।10।

 

कर्दमेन प्रजाभूतामयि सम्भवकर्दम। 

श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।11।

 

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीतवसमे गृहे।

निचदेवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।12।

 

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।

सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।13।

 

आर्द्रां यःकरिणीं यष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।14।

 

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावोदास्योश्वान्विन्देयं पुरुषानहम् ।15।

 

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्।

सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत् ।16।

उपरोक्त श्री सुक्त के प्रत्येक श्लोक को (ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महा लक्ष्मै नमः! ह्रीं श्रीं दुर्गे हरसि भितिमशेष जंतौःस्वस्थैःस्मृतामति मतीव शूभां ददासि !)  फिर श्री सुक्त का १ शलोक तत् पश्चात (दारिद्र्य दुख भय हारिणि का त्वादन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता !ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महा लक्ष्मै नमः! कहने के बाद स्वाहा कहते हुए अग्नि मे आहुति डाले !इसी प्रकार श्री सुक्त के १६ श्लोको पर बिल्व पत्र को घृत में डूबा कर आहुति प्रदान करनी है ! उदाहरणार्थ ः-ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महा लक्ष्मै नमः! ह्रीं {श्रीं दुर्गे हरसि भितिमशेष जंतौःस्वस्थैःस्मृतामति मतीव शूभां ददासि !हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो ममावह ।1। दारिद्र्य दुख भय हारिणि का त्वादन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्र चित्ता !ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महा लक्ष्मै नमः!}

 

 

 

 

महात्म्य

 

पद्मानने पद्म ऊरू पद्माक्षी पद्मसम्भवे।

तन्मेभजसि पद्माक्षी येन सौख्यं लभाम्यहम् ।17।

 

अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने।

धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे ।18।

 

पद्मानने पद्मविपद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि। 

विश्वप्रिये विश्वमनोनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि संनिधत्स्व ।19।

 

पुत्रपौत्रं धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम्।

प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु मे ।20।

 

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः।

धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमस्तु ते ।21।

 

वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु वृत्रहा।

सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः ।23।

 

न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभा मतिः।

भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां श्रीसूक्तं जपेत् ।24।

 

सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे।

भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ।25।

 

विष्णुपत्नीं क्षमादेवीं माधवीं माधवप्रियाम्।

लक्ष्मीं प्रियसखीं देवीं नमाम्यच्युतवल्लभाम् ।26।

 

महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।27।

 

श्रीवर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाविधाच्छोभमानं महीयते।

धान्यं धनं पशुं बहुपुत्रलाभं शतसंवत्सरं दीर्घमायुः ।28।

 

 

 

आरती एवं पुष्पांजलि

गणेश, लछ्मी और भगवान जगदीश्वर की आरती Aarati करें। उसके बाद पुष्पान्जलि अर्पित करें,क्षमा Kshamaa प्रार्थना करें। 

विसर्जन

पूजनके अन्तमें हाथमें अक्षत लेकर नूतन गणेश एवं महालछ्मीकी प्रतिमाको छोडकर अन्य सभी आवाहित, प्रतिष्ठित एवं पूजित देवताओं को अक्षत छोडते हुए निम्न मंत्रसे विसर्जित करे-

यान्तु देवगणाः सर्वे पूजमादाया मामकीम् |

इष्टकामसमृध्दयर्थं पुनरागमनाया च ||

टीपः-

मंदिर, तुलसी माता, पीपल आदि के पास दीपक जलाना नहीं भुलना।

लक्ष्मी पूजा में तिल का तेल का उपयोग ही श्रेष्ठ होता  है | अभाव में सरसों का इस्तमाल कर सकते है |

संकलन कर्ता :-पंडित- भास्कर शास्त्री

 

 

 

 

 

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