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ग्रहों की युति का फल

ग्रहों की युति का फल-जन्म कुंडली के किसी भाव एक, दो या दो से अधिक ग्रह होते हैं। कोई भाव ऎसा भी होता है जिसमें कोई ग्रह नहीं होता। इस लेख के माघ्यम से हम जानें कि जन्मपत्री के किसी भाव में दो ग्रह होने का फल क्या होता है।


रवि-चंद्र एक स्थान पर हों तो जातक लोहा, पत्थर का व्यापारी, शिल्पकार, वास्तु एवं मूर्तिकला का मर्मज्ञ, रवि-मंगल एक साथ हों तो शूरवीर, यशस्वी, मिथ्या-परिश्रमी एवं अघ्ययवसायी, रवि-बुध हों तो मधुरभाषी, विद्वान, ऎश्वर्यवान, भाग्यशाली, कलाकार, लेखक, संशोधक एवं विचारक, रवि-गुरू एक साथ हों तो आस्तिक, उपदेशक, राजमान्य एवं ज्ञानवान, रवि-शुक्र एक साथ हों तो चित्रकार, नेत्ररोगी, विलासी, कामुक एवं अविचारक, रवि-शनि एक साथ हों तो अल्प वीर्य, धातुओं का ज्ञाता, आस्तिक, चंद्र-मंगल एक साथ हों तो विजयी, कुशल वक्ता, वीर, शूरवीर, कलाकुशल एवं साहसी, चंद्र-बुध एक साथ हों तो धर्म प्रेमी, विद्वान, मनोज्ञ, निर्मल बुद्धि एवं संशोधक, चंद्र-शुक्र एक साथ हों तो व्यापारी, सुखी, भोगी एवं धनी, चंद्र-शनि एक साथ हों तो शीलहीन, धनहीन, मूर्ख एवं वंचक, मंगल-बुध एक साथ हों तो धनिक, वक्ता, वैद्य, शिल्पज्ञ एवं शास्त्रज्ञ, मंगल-गुरू एक साथ हों तो गणितज्ञ, शिल्पज्ञ, विद्वान एवं वाद्यप्रिय, मंगल-शुक्र एक साथ हों तो व्यापार कुशल, धातु संशोधक, योगाभ्यासी, कार्य-परायण एवं विमान चालक, मंगल-शनि एक साथ हों तो कपटी, धूर्त, जादूगर, ढोंगी एवं अविश्वासी, बुध-गुरू एक साथ हों तो वक्ता, पंडित, सभा में भाषण देने में प्रवीण, प्रख्यात, कवि, काव्य-सृष्टा एवं संशोधक, बुध-शुक्र एक साथ हों तो मुंशी, विलासी, सुखी, राजमान्य एवं शासक, बुध-शनि एक साथ हों तो कवि, वक्ता, सभा पंडित, व्याख्याता एवं कलाकार, गुरू-शुक्र एक साथ हों तो भोक्ता, सुखी, बलवान, चतुर एवं नीतिवान, गुरू-शनि एक साथ हों तो लोकमान्य, कार्यदक्ष, धनाढ्य, यशस्वी, कीर्तिवान एवं आदर का पात्र और शुक्र-शनि एक साथ हों तो चित्रकार, पशु पालक, शिल्पी, रोगी, वीर्य-विकारी एवं व्यक्ति अल्प धनी होता है।

 

 

जब हो दो ग्रह एक साथ  

दो ग्रहों का साथ और बीमारियाँ

 

प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थितियाँ अलग-अलग होती है। यदि कुंडली के किसी खाने में दो ग्रह एक साथ हैं तो उनसे कई बीमारियाँ हो सकती है। प्रस्तुत है उनकी सामान्य जानकारी।

 

कुंडली के किसी भी खाने में दो ग्रह साथ होने पर उनसे होने वाली बीमारियाँ :

 

1. बृहस्पति-राहु : दमा, तपेदिक या श्वास की तकलीफ।

2. बृहस्पति-बुध : दमा या श्वास की तकलीफ।

3. चंद्र-राहु : पागलपन या निमोनिया (बुखार)।

4. सूर्य-शुक्र : दमा और तपेदिक।

5. मंगल-शनि : शरीर का फटना, कोढ़, रक्त संबंधी बीमारी।

6. शुक्र-राहु : नपुंसकता, स्वप्न दोष आदि गुप्तांग संबंधी रोग।

7. शुक्र-केतु : पेशाब, धातु रोग, शुगर।

8. बृहस्पति-मंगल : पीलिया।

 

कुछ खास अन्य उपाय :

 

यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से बीमारी हो तो उसके लिए कुछ सामान्य उपायों की जानकारी भी दी गई है, लेकिन उपरोक्त और निम्न उपाय लाल किताब के जानकार से पूछकर ही करें।

 

1. बुखार न उतरें तो तीन दिन लगातार गुड़ और जौ सूर्यास्त से पूर्व मंदिर में रख आएँ।

2. प्रति माह गाय, कौए और कुत्तों को मीठी रोटियाँ खिलाएँ।

3. पका हुआ सीता फल कभी-कभी मंदिर में रख आएँ।

4. रक्त चाप के लिए रात को सोते समय अपने सिरहाने पानी रख कर प्रात: पौधों को दें।

5. कान की बीमारी के लिए काले-सफेद तिल सफेद और काले कपड़े में बाँधकर जंगल या किसी सुनसान जगह पर गाड़कर आ जाएँ।

6. जब भी श्मशान या कब्रिस्तान से गुजरना तो ताँबे के सिक्के उक्त स्थान पर डालने से दैवीय सहायता प्राप्त होगी।

7. यदि आँखों में पीड़ा हो तो शनिवार को चार सूखे नारियल या खोटे सिक्के नदी में प्रवाहित करें।

8. शुगर, जोड़ों का दर्द, मूत्र रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द के लिए काले कुत्ते की सेवा करें।

9. सिरहाने कुछ रुपए-पैसे रख कर प्रात: सफाईकर्मी को दे दें।

 

नोट : उपरोक्त प्रत्येक उपाय  विशेषज्ञ की सलाह अनुसार ही करें।

 

आकस्मिकता देती है शनि-मंगल की युति  

अचानक होती है शुभ-अशुभ घटनाएँ

 

 

 

शनि और मंगल दोनों की गिनती पाप ग्रहों में होती है। कुंडली में इनकी अशुभ स्थिति भाव फल का नाश कर व्यक्ति को परेशानियों में डाल सकती है, वहीं शुभ होने पर वे व्यक्ति को सारे सुख दे डालते हैं।

 

शनि व मंगल परस्पर शत्रुता रखते हैं। इसीलिए यदि किसी कुंडली में ये दोनों ग्रह साथ-साथ हों, चाहे शुभ भावों के स्थायी क्यों न हो, जीवन को कष्टकार बनाते ही हैं। ये ग्रह जिस भी भाव में साथ-साथ हो (युति में) या सम सप्तम हो (प्रतियुति) भावजन्य फलों की हानि ही करते हैं।

 

शनि-मंगल युति-प्रतियुति जीवन में आकस्मिकता का समावेश कर देती है। वैवाहिक जीवन, नौकरी, व्यवसाय, संतान, गृह सौख्य इनसे संबंधित शुभ-अशुभ घटनाएँ जीवन में अचानक घटती हैं। अचानक विवाह जुड़ना, अचानक प्रमोशन, बिना कारण घर बदलना, नौकरी छूटना, कार्यस्थल या शहर-देश से पलायन आदि शनि-मंगल युति के आकस्मिक परिणाम होते हैं।

इस युति के जातक कभी स्थायित्व प्राप्त नहीं करते, उन्नति व अव‍नति भी अचानक घटती रहती है। अन्य ग्रहों की स्थिति अनुकूल होने पर भी कम से कम आयु के 36वें वर्ष तक कष्ट व अस्‍िथरता बनी ही रहती है, फिर धीरे-धीरे स्थायित्व आता है। यह युति सरकारी नौकरी, उच्चपद प्रतिष्ठा प्राप्ति में भी रोड़े अटकाती है। पैरालिसिस जैसी बीमारी भी हो सकती है।

 

सप्तम स्थान में यह युति अत्यंत हानिकारक परिणाम देती है। मंगल के कारण तनाव-विवाद बनता है मगर शनि तुरंत विच्छेद नहीं होने देता। जीवनसाथी के स्वास्थ्य में कष्ट बना रहता है, व्यवनाधीन होने, कटु वक्ता होने के भी योग बनाता है और तालमेल के अभाव में वैवाहिक जीवन दुखी बनाता है।

 

अत: ऐसी युति वाले जातकों का विवाह बड़ों की सहमति से व बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।

बुध शनि की प्रकृति

बुध व्यापार प्रधान ग्रह है,सूर्य का साथी है,जाति से बनिया है,स्वभाव से राजकुमार है,कार्य से बातूनी है,अधिक मजाक करना इसकी सिफ़्त है,ह्रदय से जिसके साथ चलदे उसी की गाने लगता है,घर में घरानी और बाहर राजरानी वाला भी स्वभाव अपनाता है। बातूनी होना और अपनी बात को सामने रखकर अपनी ही कहते रहना इसका प्राकृतिक स्वभाव है। शनि कर्म का दाता है,प्रकृति से ठंडा और मन से चालाक है,रात का कारक,अन्धेरे का राजा है,नीची बस्तियों मे रहने वाला,नीच की संगति करने वाला,माना जाता है,बुध और शनि के मिल जाने से कार्य के लिये कहा जा सकता है कि वह बातों की खेती करने वाला,बातों की खेती बडे आराम से नहीं की जा सकती है,उसके लिये बुद्धि की जरूरत पडती है,और बुद्धि को देने वाला बुध नहीं होता है,बुद्धि को देने वाला गुरु होता है,अगर किसी प्रकार से गुरु बुध शनि से पीछे बैठा है,तो वह अपने द्वारा बुध शनि को बातों की खेती करने के लिये ज्ञान देने लग जाता है। वह किस प्रकार की बातों की खेती करता है इसका प्रभाव गुरु के बैठने वाले स्थान से जाना जा सकता है,जैसे कर्क का गुरु ऊंची बातों की खेती करेगा,और मकर का गुरु नीची बातें करेगा। इसके साथ ही जो टोपिक बातों के होंगे वे बुध शनि के आगे के भावों के द्वारा देखने को मिलते है,जैसे बुध शनि के आगे अगर सूर्य बैठा है तो बातों की खेती में पिता या पुत्र के प्रति बातें की जायेंगी,लेकिन पिता के प्रति बातें करने के लिये भी सूर्य को देखना पडेगा कि वह किस भाव में है,अक्सर सूर्य बुध के आसपास ही होता है,या तो साथ चलता है अथवा आगे पीछे चलता है,अगर अधिक पास है तो बातों के अन्दर घमंड होता है,और अगर आसपास के भाव में अलग बैठा है तो अहम की मात्रा में उतनी ही कमी होती जाती है। सूर्य से पीछे बैठा है तो बातों में अहम होता है,और सूर्य से आगे बैठा है तो बातों के अन्दर दब्बूपन है। शनि और बुध दोनों ही दोस्त है,कारण बुध का स्वभाव लालकिताब के अनुसार हिजडे के जैसा बताया गया है,हिजडे का अर्थ नपुंसक होने से ही नहीं,मनसा वाचा कर्मणा सभी तरह से व्यक्ति के अन्दर हिजडापन दिखाई देने लगता है। शनि के साथ होने से ठंडी जुबान,जुबान के अन्दर भी चालाकी।

 

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और शनि एक ही भाव में स्थित हो तो अधिकांशत: इसके बुरे प्रभाव ही झेलने पड़ते हैं।
- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य और शनि लग्न में स्थित है तो वह व्यक्ति दुराचारी, बुरी आदतों वाला, मंदबुद्धि और पापी प्रवृत्ति का होता है।
- यदि शनि और सूर्य चतुर्थ भाव में है तो व्यक्ति नीच, दरिद्र और भाइयों तथा समाज में अपमानित होने वाला होता है।
- यदि सूर्य और शनि सप्तम भाव में स्थित है तो व्यक्ति आलसी, भाग्यहीन, स्त्री और धन से रहित, शिकार खेलने वाला और महामूर्ख होता है।
- यदि दशम भाव में यह दोनों ग्रह स्थित हो तो व्यक्ति विदेश में नौकरी करने वाला होता है। यदि इन्हें अपार धन की प्राप्ति भी हो जाए तो वह चोरी हो जाता है।
इन बुरे प्रभावों से बचने के उपाय
- प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्य हो जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।
- प्रति मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।
- शनि और सूर्य से संबंधित वस्तुएं दान करें तथा ऐसी वस्तुएं कभी दान या उपहार में स्वीकार न करें।
- गरीबों को मदद करें।
- महिलाओं का सम्मान करें और पूर्णत: धार्मिक आचरण रखें।
- प्रतिदिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।
- शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाकर विधि विधान से पूजा करें।
- हनुमान चालिसा का पाठ प्रतिदिन करें।

 



सूर्य और चन्द्र का आपसी सम्बन्ध

सूर्य और चन्द्रमा अगर किसी भाव में एक साथ होते है,तो कारकत्व के अनुसार फ़ल देते है,सूर्य पिता है और चन्द्र यात्रा है,पुत्र को भी यात्रा हो सकती है,एक संतान की उन्नति बाहर होती है।

सूर्य और मंगल का आपसी सम्बन्ध

मंगल के साथ एक साथ होने पर मंगल की गर्मी और पराक्रम के कारण अभिमान की मात्रा बढ जाती है,पिता प्रभावी और शक्ति मान बन जाता है,मन्गल भाई है,इसी लिये एक भाई सदा सहयोग मे रहता है,मन्गल रक्त है,इसलिये ही पिता पुत्र को रक्त वाली बीमारिया होती है,एक दूसरे से एक सात और एक बारह में भी यही प्रभाव होता है,स्त्री की कुन्डली में पति प्रभावी होता है,लेकिन उसके ह्रदय में प्रेम अधिक होता है।

सूर्य और बुध का आपसी सम्बन्ध

बुध के साथ होने पर पिता और पुत्र दोनो ही शिक्षित होते है,समाज में प्रतिष्ठा होती है,जातक के अन्दर वासना अधिक होती है,पिता के पास भूमि भी होती है,और बहिन काफ़ी प्रतिष्ठित परिवार से सम्बन्ध रखती है,व्यापारिक कार्यों के अन्दर पिता पुत्र दोनो ही निपुण होते है,पिता का सम्बन्ध किसी महिला से होता है।

सूर्य और गुरु का आपसी सम्बन्ध

गुरु के साथ होने पर जीवात्मा का संयोग होता है,जातक का विश्वास ईश्व्वर में अधिक होता है,जातक परिवार के किसी पूर्वज की आत्मा होती है,जातक के अन्दर परोपकार की भावना होती है,जातक के पास आभूषण आदि की अधिकता होती है,पद प्रतिष्ठा के अन्दर आदर मिलता रहता है।

सूर्य और शुक्र का आपसी सम्बन्ध

शुक्र के साथ होने पर मकान और धन की अधिकता होती है,दोनो की युति के चलते संतान की कमी होती है,स्त्री की कुन्डली में यह युति होने पर स्वास्थ्य की कमी मिलती है,शुक्र अस्त हो तो स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पडता है।

सूर्य और शनि का आपसी सम्बन्ध

शनि के साथ होने पर जातक या पिता के पास सरकार से सम्बन्धित कार्य होते है,पिता के जीवन में जातक के जन्म के समय काफ़ी परेशानी होती है,पिता के रहने तक पुत्र आलसी होता है,और पिता के बाद खुद जातक का पुत्र आलसी हो जाता है,पिता पुत्र के एक साथ रहने पर उन्नति नही होती है,वैदिक ज्योतिष में इसे पितृ दोष माना जाता है,जातक को गायत्री के जाप के बाद सफ़लता मिलने लगती है।

सूर्य और राहु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ राहु का होना भी पितामह के बारे में प्रतिष्ठित होने की बात मालुम होती है,एक पुत्र की पैदायस अनैतिक रूप से भी मानी जाती है,जातक के पास कानून से विरुद्ध काम करने की इच्छायें चला करती है,पिता की मौत दुर्घटना में होती है,या किसी दवाई के रियेक्सन या शराब के कारण होती है,जातक के जन्म के समय पिता को चोट लगती है,जातक को सन्तान भी कठिनाई से मिलती है,पत्नी के अन्दर गुप चुप रूप से सन्तान को प्राप्त करने की लालसा रहती है,पिता के किसी भाई को जातक के जन्म के बाद मौत जैसी स्थिति होती है।

सूर्य और केतु का आपसी सम्बन्ध

केतु और सूर्य का साथ होने पर जातक और उसका पिता धार्मिक होता है,दोनो के कामों के अन्दर कठिनाई होती है,पिता के पास कुछ इस प्रकार की जमीन होती है,जहां पर खेती नही हो सकती है,नाना की लम्बाई अधिक होती है,और पिता के नकारात्मक प्रभाव के कारण जातक का अधिक जीवन नाना के पास ही गुजरता है।

 

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तीन ग्रहों की युति का फल


पिछले लेख के माध्यम से हमने दो ग्रहों की युति का फल जाना। इस बार जानेंगे कि यदि तीन ग्रह एक साथ किसी भाव में होने पर क्या फल देते हैं-
रवि-चंद्र-मंगल एक साथ हों तो जातक शूरवीर, धीर, ज्ञानी, बली, वैज्ञानिक, शिल्पी एवं कार्यदक्ष, रवि-चंद्र-बुध एक साथ हों तो तेजस्वी, विद्वान, शास्त्र प्रेमी, राजमान्य, भाग्यशाली एवं नीति विशारद, रवि-चंद्र-गुरू एक साथ हों तो योगी, ज्ञानी, मर्मज्ञ, सौम्यवृत्ति, सुखी, स्नेही, विचारक, कुशल कार्यकर्ता एवं आस्तिक, रवि-चंद्र-शुक्र एक साथ हों तो व्यापारी, सुखी, नि:संतान या अल्प संतान वाला, लोभी एवं साधारण धनी, रवि-चंद्र-शनि एक साथ हों तो अज्ञानी, धूर्त, वाचाल, पाखंडी, अविवेकी, चंचल एवं अविश्वासी, रवि-मंगल-बुध एक साथ हों तो साहसी, निष्ठुर, ऎश्वर्यहीन, तामसी, अविवेकी, अहंकारी एवं व्यर्थ की बात करने वाला, रवि-मंगल-गुरू एक साथ हों तो राजमान्य, सत्यवादी, तेजस्वी, धनिक, प्रभावशाली एवं ईमानदार, रवि-मंगल-शुक्र एक साथ हों तो कुलीन, कठोर, वैभवशाली, नेत्र रोगी एवं प्रवीण, रवि-मंगल-शनि एक साथ हों तो धन-जनहीन, दुखी, लोभी एवं अपमानित होने वाला, रवि-बुध-गुरू एक साथ हों तो विद्वान, चतुर, शिल्पी, लेखक, कवि, शास्त्र रचयिता, नेत्र या वात रोगी एवं ऎश्वर्यवान, रवि-बुध-शुक्र एक साथ हों तो दुखी, वाचाल, भ्रमणशील, द्वेषी एवं घृणित कार्य करने वाला, रवि-बुध-शनि एक साथ हों तो कलाद्वेषी, कुटिल, धननाशक, छोटी अवस्था में सुंदर पर 36 वर्ष की अवस्था में विकृतदेही एवं नीच कर्मरत, रवि-गुरू-शुक्र एक साथ हो, तो परोपकारी, सज्जन, राजमान्य, नेत्र विकारी, लब्ध प्रतिष्ठ एवं सफल कार्य संचालक, रवि-गुरू-शनि एक साथ हों तो चरित्रहीन, दुखी, शत्रु पीडि़त, उद्विग्न, कुष्ठ रोगी एवं नीच, रवि-शुक्र-शनि एक साथ हों तो दुश्चरित्र, नीच कार्यरत, घृणित रोग से पीडि़त एवं लोक तिरस्कृत, चंद्र-मंगल-बुध एक साथ हों तो कठोर, पापी, धूर्त, क्रूर एवं दुष्ट स्वभाव वाला, चंद्र-बुध-गुरू एक साथ हों तो धन लोभी, ईष्र्यालु, आचारहीन, दंभिक, मायावी और धूर्त, चंद्र-बुध-शनि एक साथ हों तो अशांत प्राज्ञ, वचनपटु, राजमान्य एवं कार्य परायण, चंद्र-गुरू-शुक्र एक साथ हों तो सुखी, सदाचारी, धनी, ऎश्वर्यवान, नेता, कत्तüव्यशील एवं कुशाग्रबुद्धि, चंद्र-गुरू-शनि एक साथ हों तो नीतिवान, नेता, सुबुद्धि, शास्त्रज्ञ व्यवसायी, अघ्यापक एवं वकील, चंद्र-शुक्र-शनि एक साथ हों तो लेखक, शिक्षक, सुकर्मरत, ज्योतिषी, संपादक, व्यवसायी एवं परिश्रमी, मंगल-बुध-गुरू एक साथ हों तो कवि, श्रेष्ठ पुरूष, गायन-निपुण, स्त्री-सुख से युक्त, परोपकारी, उन्नतिशील, महžवाकांक्षी एवं जीवन में बड़े-बड़े कार्य करने वाला, मंगल-बुध-शुक्र एक साथ हों तो कुलहीन, विकलांगी, चपल, परोपकारी एवं जल्दबाज, मंगल-बुध-शनि एक साथ हों तो व्यसनी, प्रवासी, मुखरोगी एवं कर्तव्यच्युत, मंगल-गुरू-शुक्र एक साथ हों तो राजमित्र, विलासी, सुपुत्रवान, ऎश्वर्यवान, सुखी एवं व्यवसायी, मंगल-गुरू-शनि एक साथ हों तो पूर्ण ऎश्वर्यवान, संपन्न, सदाचारी, सुखी एवं अंतिम जीवन में महान कार्य करने वाला और गुरू-शुक्र-शनि एक साथ हों तो शीलवान, कुलदीपक, शासक, उच्च पदाधिकारी, नवीन कार्य संस्थापक एवं आश्रयदाता होता है।

सूर्य

 

यह जगतपिता है,इसी की शक्ति से समस्त ग्रह चलायमान है,यह आत्मा कारक और पितृ कारक है,पुत्र राज्य सम्मान पद भाई शक्ति दायीं आंख चिकित्सा पितरों की आत्मा शिव और राजनीति का कारक है.मेष राशि में उच्च का एवं तुला में नीच का ना जाता है,चन्द्रमा देव ग्रह है,तथा सूर्य का मित्र है,मंगल भी सूर्य का मित्र है,गुरु सूर्य का परम मित्र है,बुध सूर्य के आसपास रहता है,और सूर्य का मित्र है,शनि सूर्य पुत्र है लेकिन सूर्य का शत्रु है,कारण सूर्य आत्मा है और आत्मा का कोई कार्य नही होता है,जबकि शनि कर्म का कारक है,शुक्र का सूर्य के साथ संयोग नही हो पाता है,सूर्य गर्मी है और शुक्र रज है सूर्य की गर्मी से रज जल जाता है,और संतान होने की गुंजायस नही रहती है,इसी लिये सूर्य का शत्रु है,राहु विष्णु का विराट रूप है,जिसके अन्दर सम्पूर्ण विश्व खत्म हो रहा है,राहु सूर्य और चन्द्र दोनो का दुश्मन है,सूर्य के साथ होने पर पिता और पुत्र के बीच धुंआ पैदा कर देता है,और एक दूसरे को समझ नही पाने के कारण दोनो ही एक दूसरे से दूर हो जाते है,केतु सूर्य का सम है,और इसे किसी प्रकार की शत्रु या मित्र भावना नही है,सूर्य से सम्बन्धित व्यक्ति पिता चाचा पुत्र और ब्रहमा विष्णु महेश आदि को जाना जाता है,आत्मा राज्य यश पित्त दायीं आंख गुलाबी रंग और तेज का कारक है।

सूर्य चन्द्र और मन्गल का आपसी सम्बन्ध

सूर्य चन्द्र और मन्गल के एक साथ होने पर पिता के पास खेती होती है,और उसका काम बागवानी या कृषि से जुडा होता है,पिता का निवास स्थान बदला जाता है,जातक को रक्त विकार भी होता है,माता को पिता के भाई के द्वारा कठिनाई भी होती है,माता या सास को गुस्सा अधिक होता है,एक भाई पहले किसी कार्य से बाहर गया होता है।

सूर्य चन्द्र और बुध का आपसी सम्बन्ध

सूर्य चन्द्र बुध का साथ होने पर खेती वाले कामो की ओर इशारा करता है,पिता का सम्बन्ध किसी बाहरी महिला से होता है,एक पुत्र का मन देवी भक्ति में लगा रहता है,और वह अक्सर देवी यात्रा किया करता है,एक पुत्र की विदेश यात्रा भी होती है,पिता जब भी भूमि को बेचता या खरीदता है,तो उसे धोखा ही दिया जाता है।

सूर्य चन्द्र और गुरु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ चन्द्र और गुरु के होने पर जातक का पिता यात्रा वाले कामो के अन्दर लगा रहता है,और अक्सर निवास स्थान का बदलाव हुआ करता है,जातक पिता का आज्ञाकारी होता है,और उसे बिना पिता की आज्ञा के किसी काम में मन नही लगता है,जातक का सम्मान विदेशी लोग करते है।

सूर्य चन्द्र और शुक्र का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ चन्द्र और शुक्र के होने से भी पिता का जीवन दो स्त्रियों के चक्कर में बरबाद होता रहता है,एक स्त्री के द्वारा वह छला जाता है,जातक की एक बहिन की शादी किसी अच्छे घर में होती है,पिता पुत्र के द्वारा कमाया गया धन एक बार जरूर नाश होता है,किसी प्रकार से छला जाता है,जातक की माता के नाम से धन होता है,जमीन भी होती है,मकान भी होता है,मकान पानी के किनारे होता है,या फ़िर मकान में पानी के फ़व्वारे आदि होते है,जातक के अन्दर या पिता के अन्दर मधुमेह की बीमारी होती है।

सूर्य चन्द्र और शनि का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ चन्द्र और शनि होने के कारण एक पुत्र की सेवा विदेश में होती है,पिता का कार्य यात्रा से जुडा होता है,सूर्य पिता है तो शनि कार्य और चन्द्र यात्रा से जुडा माना जाता है,शनि के कारण माता का स्वास्थ खराब रहता है,उसे ठंड या गठिया वाली बीमारिया होती है।

सूर्य चन्द्र और राहु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ चन्द्र और राहु होने से पिता और पुत्र दोनो को ही टीवी देखने और कम्प्यूटर पर चित्रण करने का शौक होता है,फ़ोटोग्राफ़ी का शौक भी होता है,दादा काफ़ी विलासी रहे होते है,उनका जीवन शराब या लोगों की आफ़तों को समाप्त करने के अन्दर गया होता है,अथवा आयुर्वेद के इलाजो से उन्होने अपना समय ठीक बिताया होता है,एक पुत्र का अनिष्ट माना जाता है,चन्द्र गर्भ होता है,तो राहु मौत का नाम जाना जाता है,राहु चन्द्र मिलकर मुस्लिम महिला से भी लगाव रखते है,पिता का सम्बन्ध किसी विदेशी या मुस्लिम या विजातीय महिला से रहा होता है।

सूर्य चन्द्र और केतु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य चन्द्र केतु के साथ होने पर पितामह एक वैदिक जानकार रहे होते है,नानी भी धार्मिक और वैदिक किताबों के पठन पाठन और प्रवचनो से जुडी होती है,माता को कफ़ की परेशानी होती है,जातक के पास खेती करने वाले या पानी से जुडे अथवा चांदी का काम करने वाले हथियार होते है,वह इन हथियारो की सहायता से इनका काम करना जानता है,चन्द्रमा खेती भी है और आयुर्वेद भी है एक पुत्र को आयुर्वेद या खेती का ज्ञान भी माना जाता है.शहरों मे इस काम को पानी के नलों को फ़िट करने वाला और मीटर की रीडिंग लेने वाले से भी जोडा जाता है.सरकारी पाइपलाइन या पानी की टंकी का काम भी इसी ग्रह युति मे जोडा जाता है।

सूर्य मंगल और चन्द्र का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ मंगल और चन्द्र के होने से पिता पराक्रमी और जिद्दी स्वभाव का माना जाता है,जातक या पिता के पास पानी की मशीने और खेती करने वाली मशीने भी हो सकती है,जातक पानी का व्यवसाय कर सकता है,जातक के भाई के पास यात्रा वाले काम होते है,जातक या पिता का किसी न किसी प्रकार का सेना या पुलिस से लगाव होता है।

सूर्य मंगल और बुध का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ मन्गल और बुध के होने से तीन भाई का योग होता है,अगर तीनो ग्रह पुरुष राशि में हो तो,सूर्य और मन्गल मित्र है,इसलिये जातक के दो भाई आज्ञाकारी होते है,बुध मन्गल के सामने एजेन्ट बन जाता है,अत: इस प्रकार के कार्य भी हो सकते है,मंगल कठोर और बुध मुलायम होता है,जातक के भाई के साथ किसी प्रकार का धोखा भी हो सकता है।

सूर्य मंगल और गुरु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य मन्गल और गुरु के साथ होने पर जातक का पिता प्रभावशाली होता है,जातक का समाज में स्थान उच्च का होता है,जीवात्मा संयोग भी बन जाता है,सूर्य और गुरु मिलकर जातक को मंत्री वाले काम भी देते है,अगर किसी प्रकार से राज्य या राज्यपरक भाव का मालिक हो,जातक का भाग्योदय उम्र की चौबीसवें साल के बाद चालू हो जाता है,जातक के पिता को अधिकार में काफ़ी कुछ मिलता है,जमीन और जागीरी वाले ठाठ पूर्वजों के जमाने के होते है।

सूर्य मंगल और शुक्र का आपसी सम्बन्ध

सूर्य मन्गल और शुक्र से पिता के पास एक भाई और एक बहिन का संयोग होता है,पिता की सहायतायें एक स्त्री के लिये हुआ करती है,जातक का चाचा अपने बल से पिता का धन प्राप्त करता है,जातक की पत्नी के अन्दर अहम की भावना होती है,और वह अपने को दिखाने की कोशिश करती है,एक बहिन या जातक की पुत्री के पास अकूत धन की आवक होती है,जातक के एक भाई की उन्नति शादी के बाद होती है।

सूर्य मंगल और शनि का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ मंगल और शनि के होने से जातक की सन्तान को कष्ट होता है,पिता के कितने ही दुश्मन होते है,और पिता से हारते भी है,जातक की उन्नति उम्र की तीस साल के बाद होती है,जीवन के अन्दर संघर्ष होता है,और जितने भी अपने सम्बन्धी होते है वे ही हर काम का विरोध करते है,भाई को अनिष्ट होता है,स्थान परिवर्तन समस्याओं के चलते रहना होता रहता है,कार्य कभी भी उंची स्थिति के नही हो पाते है,कारण सूर्य दिन का राजा है और शनि रात का राजा है दोनो के मिलने से कार्य केवल सुबह या शाम के रह जाते है,केवल पराक्रम से ही जीवन की गाडी चलती रहती है।

सूर्य मंगल और राहु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य मन्गल के साथ राहु के होने से इन तीनो का योग पिता की कामों में किसी प्रकार की इन्डस्ट्री की बात का इशारा देता है,जातक की एक भाई की दुर्घटना किसी तरह से होती है,जातक का अन्तिम जीवन परेशानी में होता है,पुत्र से जातक को कष्ट होता है,कम्प्यूटर या फ़ोटोग्राफ़ी का काम भी जातक के पास होता है।

सूर्य मंगल और केतु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य मन्गल और केतु के साथ होने से जातक के परिवार में हमेशा अनबन रहती है,जातक को कानून का ज्ञान होता है,और जातक का जीवन आनन्द मय नही होता है उसका स्वभाव रूखापन लिये होता है,नेतागीरी वाले काम होते है,एक पुत्र को परेशानी ही रहती है,जातक के शरीर में रक्त विकार हुआ करते है।

सूर्य बुध और चन्द्र का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ बुध और चन्द्रमा की युति होने से पिता का जीवन बुद्धि जीवी कामो में गुजरता है,पिता कार्य के संचालन में माहिर होता है,जातक या जातक का पिता दवाइयों वाले कामों के अन्दर माहिर होते है,चन्द्रमा फ़ल फ़ूल या आयुर्वेद की तरफ़ भी इशारा करता है,इसलिये बुध व्यापार की तरफ़ भी इशारा करता है,जातक की शिक्षा में एक बार बाधा जरूर आती है लेकिन वह किसी न किसी प्रकार से अपनी बाधा को दूर कर देता है।

सूर्य बुध और मंगल का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ बुध और मन्गल के होने से जातक के पिता को भूमि का लाभ होता है,जातक की शिक्षा मे अवरोध पैदा होता है,जातक के भाइयों के अन्दर आपसी मतभेद होते है,जो आगे चलकर शत्रुता में बदल जाते है।

सूर्य बुध और गुरु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य बुध और गुरु का साथ होने से जातक जवान से ज्ञान वाली बातों का प्रवचन करता है,योग और उपासना का ज्ञानी होता है,पिता को उसके जीवन के आरम्भ मे कठिनाइयों का सामना करना पडता है,लेकिन जातक के जन्म के बाद पिता का जीवन सफ़ल होना चालू हो जाता है,जातक का एक भाई लोकप्रिय होता है,पिता को समाज का काम करने मे आनन्द आता है और वह अपने को सन्यासी जैसा बना लेता है।

सूर्य बुध और शुक्र का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ बुध और शुक्र के होने से जातक की एक संतान बहुत ही शिक्षित होती है,उसके पास भूमि भवन और सवारी के अच्छे साधन होते है,पिता के जीवन में दलाली बाले काम होते है,वह शेयर या भवन या भूमि की दलाली के बाद काफ़ी धन कमाता है,जातक या जातक के पिता को दो स्त्री या दो पति का सुख होता है,जातक समाज सेवी और स्त्री प्रेमी होता है।

सूर्य बुध और शनि का आपसी सम्बन्ध

सूर्य बुध के साथ शनि के होने पर जातक के पिता के साथ सहयोग नही होता है,पिता के पास जो भी काम होते है वे सरकारी और बुद्धि से जुडे होते है,बुद्धि के साथ कर्म का योग होता है,जातक को सरकार से किसी न किसी प्रकार की सहायता मिलती है,राजकीय सेवा में जाने का पूरा पूरा योग होता है।

 

 

सूर्य बुध और राहु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य बुध के साथ राहु के होने से जातक एक पिता और पितामह दोनो ही प्रसिद्ध रहे होते है,पिता के पास धन और भूमि भी होती है,लेकिन वह जातक के जन्म के बाद धन को दवाइयों या आकस्मिक हादसों मे अथवा शराब आदि में उडाना चालू कर देता है,एयर लाइन्स वाले काम या उनसे सम्बन्धित एजेन्सी वाले काम भी मिलते है,यात्राओं को अरेन्ज करने वाले काम और सडकॊ की नाप जोख के काम भी मिलते है,जातक को पैतृक सम्पत्ति कम ही मिल पाती है।

सूर्य बुध और केतु का आपसी सम्बन्ध

सूर्य के साथ बुध और केतु होने से जातक के मामा का परिवार प्रभावी होता है,पिता या जातक को कोर्ट केशो से और बेकार के प्रत्यारोंपो से कष्ट होता है,पिता के अवैद्य संबन्धों के कारण परिवार में तनाव रहता है,जातक को इन बातो से परेशानी होती है।

 

बालारिष्ट योग

बालारिष्ट योग

जीवन मे आयु का विचार गुरु से किया जाता है और मौत का विचार राहु से किया जाता है,कुंडली में गोचर का गुरु जब जब जन्म के राहु से युति लेता है,या राहु जन्म के गुरु से युति लेता है,अथवा गोचर का राहु गोचर के गुरु से युति लेता है,अथवा गुरु और राहु का षडाष्टक योग बनता है,अथवा गुरु के साथी ग्रह राहु से अपनी मित्रता कर रहे हो,अथवा राहु के आसपास अपनी युति मिला रहे हो,तो बालारिष्ट-योग की उत्पत्ति हो जाती है,इस योग में जातक की मौत निश्चित होती है,लेकिन मौत भी आठ प्रकार की होती है,जिसके अन्दर तीन मौत भयानक मानी जाती है।
शरीर की मौत जो बारह  भावों के अनुसार उनके रिस्तेदारों के सहित मानी जाता है,धन की हानि जो बारह भावों के कारकों के द्वारा जानी जाती है,मन की हानि जो बारह भावों के सम्बन्धियों से बिगाडखाता या दुश्मनी के रूप में मानी जाती है।
गुरु जीव का कारक है
गुरु जो जीव का कारक है,गुरु जो प्रकृति के द्वारा दी गयी सांसों का कारक है,गुरु जो जीवन के हर भाव का प्रोग्रेस का कारक है,गुरु अगर मौत का भी मालिक है तो वह मौत भी किसी न किसी प्रकार के फ़ायदे के लिये ही देता है,गुरु अगर दुशमनी का मालिक है तो वह दुश्मनी भी किसी बहुत बडे फ़ायदे के लिये मानी जाती है,गुरु अगर खर्चे के भाव का मालिक है तो खर्चा भी किसी न किसी अच्छे कारण के लिये ही करवायेगा। गुरु की युति अगर क्रूर ग्रहों से भी हो जाती है तो गुरु के प्रभाव में क्रूर ग्रह भी क्रूरता तो करते है लेकिन व्यक्ति या समाज की भलाई के करते है,गुरु के साथ पापी ग्रह मिल जाते है तो वे पाप भी भलाई के लिये ही करते है,मतलब गुरु का साथ जिस ग्रह के साथ मिल जाता है उसी की "पौ बारह हो जाती है" इस कहावत का रूप भी गुरु के अनुसार ही माना जाता है मतलब जब गुरु किसी भी भाव में प्रवेश करता है तो जीत का ही संकेत देता है,जब वह मौत के भाव में प्रवेश करता है तो जो भी जैसी भी भावानुसार मौत होती है वह आगे के जीवन के लिये या आगे की सन्तान की भलाई के लिये ही होती है। गुरु हवा कारक है उसे ठोस रूप में नही प्राप्त किया जा सकता है गुरु सांस का कारक है सांस को कभी बांध कर नही रखा जा सकता है। गुरु की राहु के साथ नही निभती है,राहु के साथ मिलकर गुरु चांडाल योग बन जाता है,एक गुरु की हैसियत चांडाल की हो जाती है वह अपने ज्ञान को मौज मस्ती के साधनो में खर्च करना शुरु कर देता है,उसे बचाने से अधिक मारने के अन्दर मजा आने लगता है,वह अपने पराक्रम को धर्म और समाज की भलाई के प्रति न सोचकर केवल बुराई और बरबादी के लिये सोचने का काम करने लगता है,गुरु जो पीले रंग का मालिक है अपने अन्दर राहु रूपी भेडिया को छुपाकर धर्म के नाम पर यौन शोषण,धन का शोषण,जीवन का शोषण करना चालू कर देता है। गुरु जो ज्ञान का कारक है वह उसे मारण मोहन वशीकरण उच्चाटन के रूप में प्रयोग करना शुरु कर देता है,वह पीले कपडों में बलि स्थानों मे जाकर जीव की बलि देना शुरु कर देता है,जब कोई भी ज्ञान मानव जीवन या जीव के अहित में प्रयोग किया जायेगा तो वह चांडाल की श्रेणी में चला जायेगा,और यही गुरु चांडाल योग की परिभाषा कही जायेगी। इसी बात को आज के युग में सूक्षमता से देखें तो जो व्यक्ति आतंकवादी गतिविधियों में लगे है,जो अकारण ही जीव हत्या और मानव के वध के उपाय सोचते है,जो खून बहाने में अपनी अतीव इच्छा जाहिर करते है,जिनके पास वैदिक ज्ञान तो है लेकिन उस ज्ञान के द्वारा वे बजाय किसी की सहायता करने के उस ज्ञान की एवज में धन को प्राप्त करते है,उसे महंगे होटलों में जाकर बीफ़ और मदिरा के साथ उपभोग करते है,उनके वैदिक ज्ञान का प्रयोग गुरु चांडाल की श्रेणी में ही माना जायेगा,"अपना काम बनता,भाड में जाये जनता",का प्रयोग केवल धर्म गुरुओं के प्रति ही नही माना जा सकता है,वह किसी प्रकार के प्राप्त किये गये ज्ञान के प्रति भी माना जा सकता है,जैसे राजनीति के अन्दर असीम ज्ञान को हासिल कर लिया और उस ज्ञान का प्रयोग जनहित में लगाना था लेकिन राहु के द्वारा दिमाग में असर आजाने से वे उसे केवल अपने अहम के लिये खर्च करने लगे,राहु जो सभी तरह से विराट रूप का मालिक है खुद को विराट रूप में दिखाने की कोशिश करने लगे,राहु जो शुक्र के साथ मिलकर चमक दमक का मालिक बना देता है,साज सज्जा से युक्त व्यक्तियों की श्रेणी में लेजाकर खडा कर देता है के रूप में अपने को प्रदर्शित करने में लग गये,लेकिन गुरु का अपना राज्य है वह सांसों के रूप में व्यक्ति के जीव के अन्दर अपना निवास बनाकर बैठा है,उसकी जब इच्छा होगी वह अपनी सांसों को समेट कर चला जायेगा,फ़िर इस देह को राहु ही अपनी रसायनिक क्रिया के द्वारा सडायेगा,या ईंधन बनकर जलायेगा,या विस्फ़ोट में उडायेगा,अथवा आसमानी यात्रा में चिथडे करके उडायेगा,आदि कारणों राहु का कारण भी सामने अवश्य आयेगा।
जीव के साथ राहु का समागम
राहु वास्तव में छाया ग्रह है,यह अपने ऊपर कोई आक्षेप नही लेता है,यह एक बिन्दु की तरह से है जो जीव के उसी के रूप में आगे पीछे चलता है,कभी जीव का साथ नही छोडता है,इसके अन्दर एक अजीब सी शक्ति होती है,जब जीव का दिमाग इसके अन्दर फ़ंस जाता है तो वह जीव के साथ जो नही होना होता है वह करवा देता है। यह तीन मिनट की गति से कुंडली में प्रतिदिन की औसत चाल चलता है,इसका भरोसा नही होता है,कि सुबह यह क्या कर रहा है दोपहर को क्या करेगा और शाम होते ही यह क्या दिखाना शुरु कर देगा। राहु को ही कालपुरुष की संज्ञा दी गयी है,वह विराट रूप में सभी के सामने है उसकी सीमा अनन्त है,उसकी दूरी को कोई नाप नही सका है,केवल उसकी संज्ञा नीले रंग के रूप में अनन्त आकाश की ऊंचाइयों में देखी जा सकती है,यह केतु से हमशा विरोध में रहता है,और उसकी उल्टी दिशा का बोधक होता है,जो केतु सहायता के रूप में सामने आता है यह उसी का बल हरण करने के बाद उसकी शक्ति और बोध दोनो को बेकार करने के लिये अपनी योग्यता का प्रमाण देने से नही चूकता है। सूर्य के साथ अपनी युति बनाते ही वह पिता या पुत्र को आलसी बना देता है,जो कार्य जीवन के प्रति उन्नति देने वाले होते है वे आलस की बजह से पूरे नही हो पाते है,वह आंखो को भ्रम में डाल देता है होता कुछ है और वह दिखाना कुछ शुरु कर देता है। जातक के साथ जो भी कार्य चल रहा होता है उसके अन्दर असावधानी पैदा करने के बाद उस कार्य को बेकार करने के लिये अपनी शक्ति को देता है,पलक झपकते ही आंख की किरकिरी बनकर सडक में मिला देता है,सूर्य के साथ जब भी मिलता है तो केवल जो भी सुनने को मिलता है वह अशुभ ही सुनने को मिलता है,जातक के स्वास्थ्य में खराबी पैदा करने के लिये राहु और सूर्य की युति मुख्य मानी जाती है। राहु से अष्टम में जब भी सूर्य का आना होता है तो या तो बुखार परेशान करता है,अथवा किसी सूर्य से सम्बन्धित कारक का खात्मा सुनने को मिलता है।
बालारिष्ट
गुरु और राहु दोनो मिलकर जहरीली गैस जैसा उपाय करते है,घर परिवार समाज वातावरण भोजन पानी आदि जीवन के सभी कारक इतना गलत प्रभाव देना चालू कर देते है कि व्यक्ति का जीवन दूभर हो जाता है,अगर व्यक्ति घर वालों के द्वारा परेशान किया जा रहा है तो पडौस के लोग भी उसे परेशान कर देते है,वह पडौस से भी दूर जाना चाहता है तो उसे कालोनी या गांव के लोग परेशान करना चालू कर देते है,जब कि उसकी कोई गल्ती नही होती है केवल वह अपने अन्दर के हाव भाव इस तरह से प्रदर्शित करने लगता है जैसे कि उसके पास कोई बहुत बडी आफ़त आने वाली हो और वह हर बात में डर रहा हो। राहु जो विराट है वह जीव को अपने में समालेने के लिये आसपास अपना माहौल फ़ैला लेता है,और जीव किसी भी तरह से उसके चंगुल में आ ही जाता है,बहुत ही भाग्य या पौरुषता होती है तो जीव बच पाता है,अन्यथा वह राहु का ग्रास तो बन ही जाता है।  

अनेक परेशानियों का समाधान

अकारण परेशान करने वाले व्यक्ति से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए :

यदि कोई व्यक्ति बगैर किसी कारण के परेशान कर रहा हो, तो शौच क्रिया काल में शौचालय में बैठे-

बैठे वहीं के पानी से उस व्यक्ति का नाम लिखें और बाहर निकलने से पूर्व जहां पानी से नाम लिखा था, उस स्थान पर अपने बाएं पैर से तीन बार ठोकर मारें। ध्यान रहे, यह

प्रयोग स्वार्थवश न करें, अन्यथा हानि हो सकती है।

 

·                     कुछ उपयोगी टोटके
        शत्रु शमन के लिए :

·                     साबुत उड़द की काली दाल के 38 और चावल के 40 दाने मिलाकर किसी गड्ढे में दबा दें और ऊपर से नीबू निचोड़ दें। नीबू निचोड़ते समय शत्रु का नाम लेते रहें, उसका शमन होगा और वह आपके विरुद्ध कोई कदमनहीं उठाएगा।

       
ससुराल में सुखी रहने के लिए :

कन्या अपने हाथ से हल्दी की 7 साबुत गांठें, पीतल का एक टुकड़ा और थोड़ा-सा गुड़ ससुराल की तरफ फेंके, ससुराल में सुरक्षित और सुखी रहेगी।

घर की महिलाएं यदि किसी समस्या या बाधा से पीड़ित हों, तो निम्नलिखित प्रयोग करें।

 

सवा पाव मेहंदी के तीन पैकेट (लगभग सौ ग्राम प्रति पैकेट) बनाएं और तीनों पैकेट लेकर काली मंदिर या शस्त्र धारण किए हुए किसी देवी की मूर्ति वाले मंदिर में जाएं। वहां दक्षिणा, पत्र, पुष्प, फल, मिठाई, सिंदूर तथा वस्त्र के साथ मेहंदी के उक्त तीनों पैकेट चढ़ा दें। फिर भगवती से कष्ट निवारण की प्रार्थना करें और एक फल तथा मेहंदी के दो पैकेट वापस लेकर कुछ धन के साथ किसी भिखारिन या अपने घर के आसपास सफाई करने वाली को दें। फिर उससे मेहंदी का एक पैकेट वापस ले लें और उसे घोलकर पीड़ित महिला के हाथों एवं पैरों में लगा दें। पीड़िता की पीड़ा मेहंदी के रंग उतरने के साथ-साथ धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी।

  • पति-पत्नी के बीच वैमनस्यता को दूर करने हेतु :
  • रात को सोते समय पत्नी पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति पत्नी के तकिये में कपूर की २ टिकियां रख दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर उस कमरे जला दें।

19.       पति को वश में करने के लिए :

यह प्रयोग शुक्ल में पक्ष करना चाहिए ! एक पान का पत्ता लें ! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें ! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें ! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय ! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय ! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो ! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें ! 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें ! शीघ्र समस्या का समाधान होगा !

 

शनिवार की रात्रि में ७ लौंग लेकर उस पर २१ बार जिस व्यक्ति को वश में करना हो उसका नाम लेकर फूंक मारें और अगले रविवार को इनको आग में जला दें। यह प्रयोग लगातार ७ बार करने से अभीष्ट व्यक्ति का वशीकरण होता है।

 

 

अगर आपके पति किसी अन्य स्त्री पर आसक्त हैं और आप से लड़ाई-झगड़ा इत्यादि करते हैं। तो यह प्रयोग आपके लिए बहुत कारगर है, प्रत्येक रविवार को अपने घर तथा शयनकक्ष में गूगल की धूनी दें। धूनी करने से पहले उस स्त्री का नाम लें और यह कामना करें कि आपके पति उसके चक्कर से शीघ्र ही छूट जाएं। श्रद्धा-विश्वास के साथ करने से निश्चिय ही आपको लाभ मिलेगा।

 

शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर अपने पूजन स्थल पर आएं। एक थाली में केसर से स्वस्तिक बनाकर गंगाजल से धुला हुआ मोती शंख स्थापित करें और गंध, अक्षत पुष्पादि से इसका पूजन करें। पूजन के समय गोघृत का दीपक जलाएं और निम्नलिखित मंत्र का 1 माला जप स्फटिक की माला पर करें। श्रद्धा-विश्वास पूर्वक 1 महीने जप करने से किसी भी व्यक्ति विशेष का मोहन-वशीकरण एवं आकर्षण होता है। जिस व्यक्ति का नाम, ध्यान करते हुए जप किया जाए वह व्यक्ति साधक का हर प्रकार से मंगल करता है। यह प्रयोग निश्चय ही कारगर सिद्ध होता है।

मंत्र : ऊँ क्रीं वांछितं मे वशमानय स्वाहा।''

 

जिन स्त्रियों के पति किसी अन्य स्त्री के मोहजाल में फंस गये हों या आपस में प्रेम नहीं रखते हों, लड़ाई-झगड़ा करते हों तो इस टोटके द्वारा पति को अनुकूल बनाया जा सकता है।

गुरुवार अथवा शुक्रवार की रात्रि में १२ बजे पति की चोटी (शिखा) के कुछ बाल काट लें और उसे किसी ऐसे स्थान पर रख दें जहां आपके पति की नजर न पड़े। ऐसा करने से आपके पति की बुद्धि का सुधार होगा और वह आपकी बात मानने लगेंगे। कुछ दिन बाद इन बालों को जलाकर अपने पैरों से कुचलकर बाहर फेंक दें। मासिक धर्म के समय करने से अधिक कारगर सिद्ध होगा।

·                      

·                      

·                     वैवाहिक सुख के लिए :

 कन्या का विवाह हो जाने के बाद उसके घर से विदा होते समय एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी सी हल्दी और एक पीला सिक्का डालकर उसके आगे फेंक दें, उसका वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा।

घर की कलह को समाप्त करने का उपाय

रोजाना सुबह जागकर अपने स्वर को देखना चाहिये,नाक के बायें स्वर से जागने पर फ़ौरन बिस्तर छोड कर अपने काम में लग जाना चाहिये,अगर नाक से दाहिना स्वर चल रहा है तो दाहिनी तरफ़ बगल के नीचे तकिया लगाकर दुबारा से सो जाना चाहिये,कुछ समय में बायां स्वर चलने लगेगा,सही तरीके से चलने पर बिस्तर छोड देना चाहिये।

4.      कुंवारी कन्या

 

१.       यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !

.      प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी  

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परिवार में शांति बनाए रखने के लिए :

 बुधवार को मिट्टी के बने एक शेर को उसके गले में लाल चुन्नी बांधकर और लाल टीका लगाकर माता के मंदिर में रखें और माता को अपने परिवार की सभी समस्याएं बताकर उनसे शांति बनाए रखने की विनती करें। यह क्रिया निष्ठापूर्वक करें, परिवार में शांति कायम होगी।

 

 

 

 

 

संतान होने और नही होने की पहिचान करना

पुरुष और स्त्री के दाहिने हाथ मे साफ़ मिट्टी रख कर उसके अन्दर थोडा दही और पिसी शुद्ध हल्दी रखनी चाहिये,यह काम रात को सोने से पहले करना चाहिये,सुबह अगर दोनो के हाथ में हल्दी का रंग लाल हो गया है तो संतान आने का समय है,स्त्री के हाथ में लाल है और पुरुष के हाथ में पीली है तो स्त्री के अन्दर कामवासना अधिक है,पुरुष के हाथ में लाल हो गयी है और स्त्री के हाथ में नही तो स्त्री रति सम्बन्धी कारणों से ठंडी है,और संतान पैदा करने में असमर्थ है,कुछ समय के लिये रति क्रिया को बंद कर देना चाहिये।

 

शादी विवाह में विघ्न न पडने देने के लिये टोटका

शादी वाले दिन से एक दिन पहले एक ईंट के ऊपर कोयले से "बाधायें" लिखकर ईंट को उल्टा करके किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये,और शादी के बाद उस ईंट को उठाकर किसी पानी वाले स्थान पर डाल कर ऊपर से कुछ खाने का सामान डाल दीजिये,शादी विवाह के समय में बाधायें नहीं आयेंगी।

 

 

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दिमाग से चिन्ता हटाने का टोटका

अधिकतर पारिवारिक कारणों से दिमाग बहुत ही उत्तेजना में आजाता है,परिवार की किसी समस्या से या लेन देन से,अथवा किसी रिस्तेनाते को लेकर दिमाग एक दम उद्वेलित होने लगता है,ऐसा लगने लगता है कि दिमाग फ़ट पडेगा,इसका एक अनुभूत टोटका है कि जैसे ही टेंसन हो एक लोटे में या जग में पानी लेकर उसके अन्दर चार लालमिर्च के बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के बाद घर के बाहर सडक पर फ़ेंक दीजिये,फ़ौरन आराम मिल जायेगा।

11.       मानसिक परेशानी दूर करने के लिए :

रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें !

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·                      

       व्यक्तिगत बाधा निवारण के लिए

  • व्यक्तिगत बाधा के लिए एक मुट्ठी पिसा हुआ नमक लेकर शाम को अपने सिर के ऊपर से तीन बार उतार लें और उसे दरवाजे के बाहर फेंकें। ऐसा तीन दिन लगातार करें। यदि आराम न मिले तो नमक को सिर के ऊपर वार कर शौचालय में डालकर फ्लश चला दें। निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
  •  
  • हमारी या हमारे परिवार के किसी भी सदस्य की ग्रह स्थिति थोड़ी सी भी अनुकूल होगी तो हमें निश्चय ही इन उपायों से भरपूर लाभ मिलेगा।

·                      

·                      

·                     5॰ व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य के करने में बार-बार असफलता मिल रही हो तो यह टोटका करें- सरसों के तैल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें -“हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना।´´ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।

·                      

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·                      

·                     रोग से छुट कारा पाने के लिए

·                     यदि बीमारी का पता नहीं चल पा रहा हो और व्यक्ति स्वस्थ भी नहीं हो पा रहा हो, तो सात प्रकार के अनाज एक-एक मुट्ठी लेकर पानी में उबाल कर छान लें। छने व उबले अनाज (बाकले) में एक तोला सिंदूर की पुड़िया और ५० ग्राम तिल का तेल डाल कर कीकर (देसी बबूल) की जड़ में डालें या किसी भी रविवार को दोपहर १२ बजे भैरव स्थल पर चढ़ा दें।

·                      

·                     बदन दर्द हो, तो मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में सिक्का चढ़ाकर उसमें लगी सिंदूर का तिलक करें।

·                      

·                                            पानी पीते समय यदि गिलास में पानी बच जाए, तो उसे अनादर के साथ फेंकें नहीं, गिलास में ही रहने दें। फेंकने से मानसिक अशांति होगी क्योंकि पानी चंद्रमा का कारक है।

 

नजर बाधा दूर करने के लिए

·                                            मिर्च, राई व नमक को पीड़ित व्यक्ति के सिर से वार कर आग में जला दें। चंद्रमा जब राहु से पीड़ित होता है तब नजर लगती है। मिर्च मंगल का, राई शनि का और नमक राहु का प्रतीक है। इन तीनों को आग (मंगल का प्रतीक) में डालने से नजर दोष दूर हो जाता है। यदि इन तीनों को जलाने पर तीखी गंध न आए तो नजर दोष समझना चाहिए। यदि आए तो अन्य उपाय करने चाहिए।

·                                             

: 13.       किसी रोग से ग्रसित होने पर :

·                                           सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें ! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें ! सेहत ठीक रहेगी !

एक रुपये का सिक्का रात को सिरहाने में रख कर सोएं और सुबह उठकर उसे श्मशान के आसपास फेंक दें, रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

              
         

6॰ सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।

 

                                              VIVAH

 

 

शादी करने का अनुभूत उपाय

पुरुषों को विभिन्न रंगों से स्त्रियों की तस्वीरें और महिलाओं को लाल रंग से पुरुषों की तस्वीर सफ़ेद कागज पर रोजाना तीन महिने तक एक एक बनानी चाहिये।

                    

 

 

 

                   

bride_310अगर लड़की की उम्र निकली जा रही है और सुयोग्य लड़का नहीं मिल रहा। रिश्ता बनता है फिर टूट जाता है। या फिर शादी में अनावश्यक देरी हो रही हो तो कुछ छोटे-छोटे सिद्ध टोटकों से इस दोष को दूर किया जा सकता है। ये टोटके अगर पूरे मन से विश्वास करके अपनाए जाएं तो इनका फल बहुत ही कम समय में मिल जाता है। जानिए क्या हैं ये टोटके :-

1. रविवार को पीले रंग के कपड़े में सात सुपारी, हल्दी की सात गांठें, गुड़ की सात डलियां, सात पीले फूल, चने की दाल (करीब 70 ग्राम), एक पीला कपड़ा (70 सेमी), सात पीले सिक्के और एक पंद्रह का यंत्र माता पार्वती का पूजन करके चालीस दिन तक घर में रखें। विवाह के निमित्त मनोकामना करें। इन चालीस दिनों के भीतर ही विवाह के आसार बनने लगेंगे।

2. लड़की को गुरुवार का व्रत करना चाहिए। उस दिन कोई पीली वस्तु का दान करे। दिन में न सोए, पूरे नियम संयम से रहे।

3. सावन के महीने में शिवजी को रोजाना बिल्व पत्र चढ़ाए। बिल्व पत्र की संख्या 108 हो तो सबसे अच्छा परिणाम मिलता है।

4. शिवजी का पूजन कर निर्माल्य का तिलक लगाए तो भी जल्दी विवाह के योग बनते हैं।

 

·                     घर में खुशहाली तथा दुकान की उन्नति हेतु :

·                     घर या व्यापार स्थल के मुख्य द्वार के एक कोने को गंगाजल से धो लें और वहां स्वास्तिक की स्थापना करें और उस पर रोज चने की दाल और गुड़ रखकर उसकी पूजा करें। साथ ही उसे ध्यान रोज से देखें और जिस दिन वह खराब हो जाए उस दिन उस स्थान पर एकत्र सामग्री को जल में प्रवाहित कर दें। यह क्रिया शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को आरंभ कर ११ बृहस्पतिवार तक नियमित रूप से करें। फिर गणेश जी को सिंदूर लगाकर उनके सामने लड्डू रखें तथा ÷जय गणेश काटो कलेश' कहकर उनकी प्रार्थना करें, घर में सुख शांति आ जागी।

           
सफलता प्राप्ति के लिए :

·                     प्रातः सोकर उठने के बाद नियमित रूप से अपनी हथेलियों को ध्यानपूर्वक देखें और तीन बार चूमें। ऐसा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है। यह क्रिया शनिवार से शुरू करें।

      

·                      

·                          धन लाभ के लिए :

·                      शनिवार की शाम को माह (उड़द) की दाल के दाने पर थोड़ी सी दही और सिंदूर डालकर पीपल के नीचे रख आएं। वापस आते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें। यह क्रिया शनिवार को ही शुरू करें और ७ शनिवार को नियमित रूप से किया करें, धन की प्राप्ति होने लगेगी।

          
संपत्ति में वृद्धि हेतु :

·                     किसी भी बृहस्पतिवार को बाजार से जलकुंभी लाएं और उसे पीले कपड़े में बांधकर घर में कहीं लटका दें। लेकिन इसे बार-बार छूएं नहीं। एक सप्ताह के बाद इसे बदल कर नई कुंभी ऐसे ही बांध दें। इस तरह ७ बृहस्पतिवार करें। यह निच्च्ठापूर्वक करें, ईश्वर ने चाहा तो आपकी संपत्ति में वृद्धि अवष्य होगी।

·                      

·                     यदि घर के छोटे बच्चे पीड़ित हों, तो मोर पंख को पूरा जलाकर उसकी राख बना लें और उस राख से बच्चे को नियमित रूप से तिलक लगाएं तथा थोड़ी-सी राख चटा दें।

 

 

                       VYAPAR

व्यापार स्थल पर किसी भी प्रकार की समस्या हो, तो वहां श्वेतार्क गणपति तथा एकाक्षी श्रीफल की स्थापना करें। फिर नियमित रूप से धूप, दीप आदि से पूजा करें तथा सप्ताह में एक बार मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद यथासंभव अधिक से अधिक लोगों को बांटें। भोग नित्य प्रति भी लगा सकते हैं।

                         

                         TOTKE

पुरुखों के पास केवल अनुभूत उपाय थे,जिनके द्वारा वे रोग को तुरत दूर कर देते थे,जैसे किसी सुनसान स्थान या पेड के पास जाने पर वहां पर लगी बर्र या ततैया के झुंड के द्वारा आक्रमण करने पर व्यक्ति सहन शील होता है और विष को झेलने की हिम्मत होती है तो वह बच जाता है,अन्यथा जहरीला डंक व्यक्ति के प्राण ही लेलेता है,लेकिन इसी समय एक टोटका काम आता है,कि दाहिने हाथ के अंगूठे में अगर ततैया ने डंक मार दिया है तो फ़ौरन बायें हाथ के अंगूठे को पानी से धो डालिये,विष का पता ही नही चलेगा कि ततैया या बर्र ने काटा भी है या नहीं,इसी बात के लिये जब तक डाक्टर के पास जाते,बर्र या ततैया के डंक को निकलवाते विष रोधी इन्जेक्सन लगवाते,तो विष का दुख तो दूर हो जाता,लेकिन उस इन्जेक्सन का कुप्रभाव दिमाग की नशों को प्रभाव हीन भी कर सकता था।

 

जहरीले जानवर के काटने का टोटका

अधिकतर जाने अन्जाने में जहरीला जानवर जैसे बर्र ततैया बिच्छू मधुमक्खी आदि अपना डंक मार देते है,दर्द के मारे छटपटाहट होने लगती है,और उस समय कोई दवा नही मिलपाती है तो और भी हालत खराब हो जाती है,इसका एक अनुभूत टोटका है कि जिस स्थान पर काटा है,उसके उल्टे स्थान को पानी धो डालिये जहर खत्म हो जायेगा,जैसे दाहिने हाथ की उंगली में डंक मारा है,तो बायें हाथ की उसी उंगली को पानी से धो डालिये,बायें हिस्से में डंक मारा है तो उसी स्थान को दाहिने भाग में पानी से धो डालिये।

 

पढाई में याददास्त बढाने का टोटका

याददास्त कोई हौवा नही है,कि याद होता नही है,और याद होता नही है तो पढाई बेकार हो जाती है,परीक्षा में परिणाम नकारात्मक आता है,और दिमाग का एक कौना मानने लगता है कि यह पढाई बेकार है,इसे छोड कर कोई जीवन यापन का काम कर लेना चाहिये,और इस बेकार के झमेले को छोड देना चाहिये,लेकिन नही अगर वास्तव मे आपको पढने का चाव है और आप चाहते है कि आपका परिणाम भी उन्ही लोगों की तरह से आये जैसे कि ब्रिलियेंन्ट बच्चों का आता है,तो इस टोटके को अंजवा लीजिये।
शाम को खाना खा कर बायीं करवट ढाई घंटे के लिये लेट जाइये,फ़िर ढाई घंटे दाहिनी करवट लेट जाइये,और ढाई घंटे उठकर सीधे बैठ कर पढना चालू कर दीजिये,यह क्रम लगातार चालू रखिये,देखिये कि जो टापिक कभी याद नही होते थे,इतनी अच्छी तरह से याद हो जायेंगे कि खुद को विश्वास ही नहीं होगा।

अमीर बनने का अनुभूत टोटका

जो भी कमाया जाये उसका दसवां हिस्सा गरीबों को भोजन,कन्याओं को भोजन और वस्त्र,कन्यायों की शादी,धर्म स्थानों को बनाने के काम,आदि में खर्च करिये,देखिये कि आपकी आमदनी कितनी जल्दी बढनी शुरु हो जाती है। लेकिन दसवें हिस्से अधिक खर्च करने पर बजाय आमदनी बढने के घटने लगेगी।

 

       ट्रांसफ़र करवाने का उपाय

कार्य स्थान पर जाने के बाद पैर धोकर अपने स्थान पर बैठना चाहिये,पिसी हल्दी को बहते पानी में बहाना चाहिये।

खाना पचाने का टोटका

अधिकतर बैठे रहने से या खाना खाने के बाद मेहनत नही करने से भोजन पच नही पाता है और पेट में दर्द या पेट फ़ूलने लगता है,खाना खाने के बाद तुरंत बायीं करवट लेट जाइये,खाना आधा घन्टे में अपनी जगह बनाकर पचने लगेगा और अपान वायु बाहर निकल जायेगी।

घर से पराशक्तियों को हटाने का टोटका

एक कांच के गिलास में पानी में नमक मिलाकर घर के नैऋत्य के कोने में रख दीजिये,और उस बल्ब के पीछे लाल रंग का एक बल्व लगा दीजिये,जब भी पानी सूख जाये तो उस गिलास को फ़िर से साफ़ करने के बाद नमक मिलाकर पानी भर दीजिये।

घर मे धन की बरक्कत के लिये टोटका

सबसे छोटे चलने वाले नोट का एक त्रिकोण पिरामिड बनाकर घर के धन स्थान में रख दीजिये,जब धन की कमी होने लगे तो उस पिरामिड को बायें हाथ में रखकर दाहिने हाथ से उसे ढककर कल्पना कीजिये कि यह पिरामिड घर में धन ला रहा है,कहीं से भी धन का बन्दोबस्त हो जायेगा,लेकिन यह प्रयोग बहुत ही जरूरत में कीजिये।

ईश्वर का दर्शन करने के लिये टोटका

शाम को एकान्त कमरे में जमीन पर उत्तर की तरफ़ मुंह करके पालथी मारकर बैठ जाइये,दोनों आंखों को बन्द करने के बाद आंखों की द्रिष्टि को नाक के ऊपर वाले हिस्से में ले जाने की कोशिश करिये,धीरे धीरे रोजाना दस से बीस मिनट का प्रयोग करिये,लेकिन इस काम को करने के बीच में किसी भी प्रकार के विचार दिमाग में नही लाने चाहिये,आपको आपके इष्ट का दर्शन सुगमता से हो जायेगा।

 

 

 

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·                     अपने पूर्वजों की नियमित पूजा करें। प्रति माह अमावस्या को प्रातःकाल ५ गायों को फल खिलाएं।

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·                     सुख-समृद्धि॰

यदि परिश्रम के पश्चात् भी कारोबार ठप्प हो, या धन आकर खर्च हो जाता हो तो यह टोटका काम में लें। किसी गुरू पुष्य योग और शुभ चन्द्रमा के दिन प्रात: हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे
संकटनाशन गणेश स्तोत्र´´ के 11 पाठ करें। तत्पश्चात् इस थैली में 7 मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, एक पंचमुखी रूद्राक्ष, एक चांदी का रूपया या 2 सुपारी, 2 हल्दी की गांठ रख कर दाहिने मुख के गणेश जी को शुद्ध घी के मोदक का भोग लगाएं। फिर यह थैली तिजोरी या कैश बॉक्स में रख दें। गरीबों और ब्राह्मणों को दान करते रहे। आर्थिक स्थिति में शीघ्र सुधार आएगा। 1 साल बाद नयी थैली बना कर बदलते रहें।
2॰ किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर बटुक भैरव स्तोत्र´´ का एक पाठ कर के गौ, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा वर्ष में 4-5 बार करने से कार्य बाधाएं नष्ट हो जाएंगी।
3॰ रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें `जय गणेश काटो कलेश´।
4॰ सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की `कुशा´ की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के पश्चात् किसी शुभ कार्य में दानादि दें।
7॰ किसी शनिवार को, यदि उस दिन `सर्वार्थ सिद्धि योग’ हो तो अति उत्तम सांयकाल अपनी लम्बाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़ें। उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। तब पत्ते पर अपनी कामना रुपी नापा हुआ लाल रेशमी सूत लपेट दें और पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और कामनाओं की पूर्ति होती है।
८॰ रविवार पुष्य नक्षत्र में एक कौआ अथवा काला कुत्ता पकड़े। उसके दाएँ पैर का नाखून काटें। इस नाखून को ताबीज में भरकर, धूपदीपादि से पूजन कर धारण करें। इससे आर्थिक बाधा दूर होती है। कौए या काले कुत्ते दोनों में से किसी एक का नाखून लें। दोनों का एक साथ प्रयोग न करें।
9॰ प्रत्येक प्रकार के संकट निवारण के लिये भगवान गणेश की मूर्ति पर कम से कम 21 दिन तक थोड़ी-थोड़ी जावित्री चढ़ावे और रात को सोते समय थोड़ी जावित्री खाकर सोवे। यह प्रयोग 21, 42, 64 या 84 दिनों तक करें।
10॰ अक्सर सुनने में आता है कि घर में कमाई तो बहुत है, किन्तु पैसा नहीं टिकता, तो यह प्रयोग करें। जब आटा पिसवाने जाते हैं तो उससे पहले थोड़े से गेंहू में 11 पत्ते तुलसी तथा 2 दाने केसर के डाल कर मिला लें तथा अब इसको बाकी गेंहू में मिला कर पिसवा लें। यह क्रिया सोमवार और शनिवार को करें। फिर घर में धन की कमी नहीं रहेगी।
11॰ आटा पिसते समय उसमें 100 ग्राम काले चने भी पिसने के लियें डाल दिया करें तथा केवल शनिवार को ही आटा पिसवाने का नियम बना लें।
12॰ शनिवार को खाने में किसी भी रूप में काला चना अवश्य ले लिया करें।
13॰ अगर पर्याप्त धर्नाजन के पश्चात् भी धन संचय नहीं हो रहा हो, तो काले कुत्ते को प्रत्येक शनिवार को कड़वे तेल (सरसों के तेल) से चुपड़ी रोटी खिलाएँ।
14॰ संध्या समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है। सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए, किन्तु गीले पैर नहीं सोना चाहिए। इससे धन का क्षय होता है।
15॰ रात्रि में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है। अत: समृद्धि चाहने वालों को तथा जिन व्यक्तियों को आर्थिक कष्ट रहते हों, उन्हें इनका सेवन रात्रि भोज में नहीं करना चाहिये।
16॰ भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है। जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए।
17॰ सुबह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं। जूठे हाथों से या पैरों से कभी गौ, ब्राह्मण तथा अग्नि का स्पर्श न करें।
18॰ घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाये गये फूल या हार के सूख जाने पर भी उन्हें घर में रखना अलाभकारी होता है।
19॰ अपने घर में पवित्र नदियों का जल संग्रह कर के रखना चाहिए। इसे घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है।
20॰ रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र हो, तब गूलर के वृक्ष की जड़ प्राप्त कर के घर लाएं। इसे धूप, दीप करके धन स्थान पर रख दें। यदि इसे धारण करना चाहें तो स्वर्ण ताबीज में भर कर धारण कर लें। जब तक यह ताबीज आपके पास रहेगी, तब तक कोई कमी नहीं आयेगी। घर में संतान सुख उत्तम रहेगा। यश की प्राप्ति होती रहेगी। धन संपदा भरपूर होंगे। सुख शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होगी।
21॰ `देव सखा´ आदि 18 पुत्रवर्ग भगवती लक्ष्मी के कहे गये हैं। इनके नाम के आदि में और अन्त में `नम:´ लगाकर जप करने से अभीष्ट धन की प्राप्ति होती है। यथा - ॐ देवसखाय नम:, चिक्लीताय, आनन्दाय, कर्दमाय, श्रीप्रदाय, जातवेदाय, अनुरागाय, सम्वादाय, विजयाय, वल्लभाय, मदाय, हर्षाय, बलाय, तेजसे, दमकाय, सलिलाय, गुग्गुलाय, ॐ कुरूण्टकाय नम:।
22॰ किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है।
23॰ किसी भी आवश्यक कार्य के लिए घर से निकलते समय घर की देहली के बाहर, पूर्व दिशा की ओर, एक मुट्ठी घुघंची को रख कर अपना कार्य बोलते हुए, उस पर बलपूर्वक पैर रख कर, कार्य हेतु निकल जाएं, तो अवश्य ही कार्य में सफलता मिलती है।
24॰ अगर किसी काम से जाना हो, तो एक नींबू लें। उसपर 4 लौंग गाड़ दें तथा इस मंत्र का जाप करें : `ॐ श्री हनुमते नम:´। 21 बार जाप करने के बाद उसको साथ ले कर जाएं। काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
25॰ चुटकी भर हींग अपने ऊपर से वार कर उत्तर दिशा में फेंक दें। प्रात:काल तीन हरी इलायची को दाएँ हाथ में रखकर “श्रीं श्रीं´´ बोलें, उसे खा लें, फिर बाहर जाए¡।
26॰ जिन व्यक्तियों को लाख प्रयत्न करने पर भी स्वयं का मकान न बन पा रहा हो, वे इस टोटके को अपनाएं। प्रत्येक शुक्रवार को नियम से किसी भूखे को भोजन कराएं और रविवार के दिन गाय को गुड़ खिलाएं। ऐसा नियमित करने से अपनी अचल सम्पति बनेगी या पैतृक सम्पति प्राप्त होगी। अगर सम्भव हो तो प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात् निम्न मंत्र का जाप करें। “ॐ पद्मावती पद्म कुशी वज्रवज्रांपुशी प्रतिब भवंति भवंति।।´´
27॰ यह प्रयोग नवरात्रि के दिनों में अष्टमी तिथि को किया जाता है। इस दिन प्रात:काल उठ कर पूजा स्थल में गंगाजल, कुआं जल, बोरिंग जल में से जो उपलब्ध हो, उसके छींटे लगाएं, फिर एक पाटे के ऊपर दुर्गा जी के चित्र के सामने, पूर्व में मुंह करते हुए उस पर 5 ग्राम सिक्के रखें। साबुत सिक्कों पर रोली, लाल चन्दन एवं एक गुलाब का पुष्प चढ़ाएं। माता से प्रार्थना करें। इन सबको पोटली बांध कर अपने गल्ले, संदूक या अलमारी में रख दें। यह टोटका हर 6 माह बाद पुन: दोहराएं।
28॰ घर में समृद्धि लाने हेतु घर के उत्तरपश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा।
29॰ व्यक्ति को ऋण मुक्त कराने में यह टोटका अवश्य सहायता करेगा : मंगलवार को शिव मन्दिर में जा कर शिवलिंग पर मसूर की दाल “ॐ ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम:´´ मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं।
30॰ जिन व्यक्तियों को निरन्तर कर्ज घेरे रहते हैं, उन्हें प्रतिदिन “ऋणमोचक मंगल स्तोत्र´´ का पाठ करना चाहिये। यह पाठ शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से शुरू करना चाहिये। यदि प्रतिदिन किसी कारण न कर सकें, तो प्रत्येक मंगलवार को अवश्य करना चाहिये।
31॰ सोमवार के दिन एक रूमाल, 5 गुलाब के फूल, 1 चांदी का पत्ता, थोड़े से चावल तथा थोड़ा सा गुड़ लें। फिर किसी विष्णुण्लक्ष्मी जी के मिन्दर में जा कर मूर्त्ति के सामने रूमाल रख कर शेष वस्तुओं को हाथ में लेकर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए बारी-बारी इन वस्तुओं को उसमें डालते रहें। फिर इनको इकट्ठा कर के कहें की `मेरी परेशानियां दूर हो जाएं तथा मेरा कर्जा उतर जाए´। यह क्रिया आगामी 7 सोमवार और करें। कर्जा जल्दी उतर जाएगा तथा परेशानियां भी दूर हो जाएंगी।
32॰ सर्वप्रथम 5 लाल गुलाब के पूर्ण खिले हुए फूल लें। इसके पश्चात् डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा ले कर अपने सामने बिछा लें। इन पांचों गुलाब के फुलों को उसमें, गायत्री मंत्र 21 बार पढ़ते हुए बांध दें। अब स्वयं जा कर इन्हें जल में प्रवाहित कर दें। भगवान ने चाहा तो जल्दी ही कर्ज से मुक्ति प्राप्त होगी।
34॰ कर्ज-मुक्ति के लिये “गजेन्द्र-मोक्ष´´ स्तोत्र का प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व पाठ अमोघ उपाय है।
35॰ घर में स्थायी सुख-समृद्धि हेतु पीपल के वृक्ष की छाया में खड़े रह कर लोहे के बर्तन में जल, चीनी, घी तथा दूध मिला कर पीपल के वृक्ष की जड़ में डालने से घर में लम्बे समय तक सुख-समृद्धि रहती है और लक्ष्मी का वास होता है।
33॰ अगर निरन्तर कर्ज में फँसते जा रहे हों, तो श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह 6 शनिवार किया जाए, तो आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त होते हैं।
36॰ घर में बार-बार धन हानि हो रही हो तों वीरवार को घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़क कर गुलाल पर शुद्ध घी का दोमुखी (दो मुख वाला) दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय मन ही मन यह कामना करनी चाहिए की `भविष्य में घर में धन हानि का सामना न करना पड़े´। जब दीपक शांत हो जाए तो उसे बहते हुए पानी में बहा देना चाहिए।
37॰ काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसार कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।
38॰ घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए घर में सोने का चौरस सिक्का रखें। कुत्ते को दूध दें। अपने कमरे में मोर का पंख रखें।
39॰ अगर आप सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो आपको पके हुए मिट्टी के घड़े को लाल रंग से रंगकर, उसके मुख पर मोली बांधकर तथा उसमें जटायुक्त नारियल रखकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
40॰ अखंडित भोज पत्र पर 15 का यंत्र लाल चन्दन की स्याही से मोर के पंख की कलम से बनाएं और उसे सदा अपने पास रखें।
41॰ व्यक्ति जब उन्नति की ओर अग्रसर होता है, तो उसकी उन्नति से ईर्ष्याग्रस्त होकर कुछ उसके अपने ही उसके शत्रु बन जाते हैं और उसे सहयोग देने के स्थान पर वे ही उसकी उन्नति के मार्ग को अवरूद्ध करने लग जाते हैं, ऐसे शत्रुओं से निपटना अत्यधिक कठिन होता है। ऐसी ही परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रात:काल सात बार हनुमान बाण का पाठ करें तथा हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाए¡ और पाँच लौंग पूजा स्थान में देशी कर्पूर के साथ जलाएँ। फिर भस्म से तिलक करके बाहर जाए¡। यह प्रयोग आपके जीवन में समस्त शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम होगा, वहीं इस यंत्र के माध्यम से आप अपनी मनोकामनाओं की भी पूर्ति करने में सक्षम होंगे।
42॰ कच्ची धानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। अनिष्ट दूर होगा और धन भी प्राप्त होगा।
43॰ अगर अचानक धन लाभ की स्थितियाँ बन रही हो, किन्तु लाभ नहीं मिल रहा हो, तो गोपी चन्दन की नौ डलियाँ लेकर केले के वृक्ष पर टाँग देनी चाहिए। स्मरण रहे यह चन्दन पीले धागे से ही बाँधना है।
44॰ अकस्मात् धन लाभ के लिये शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को सफेद कपड़े के झंडे को पीपल के वृक्ष पर लगाना चाहिए। यदि व्यवसाय में आकिस्मक व्यवधान एवं पतन की सम्भावना प्रबल हो रही हो, तो यह प्रयोग बहुत लाभदायक है।
45 अगर आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हों, तो मन्दिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) लगा दें।
46॰ अगर आप अमावस्या के दिन पीला त्रिकोण आकृति की पताका विष्णु मन्दिर में ऊँचाई वाले स्थान पर इस प्रकार लगाएँ कि वह लहराता हुआ रहे, तो आपका भाग्य शीघ्र ही चमक उठेगा। झंडा लगातार वहाँ लगा रहना चाहिए। यह अनिवार्य शर्त है।
47॰ देवी लक्ष्मी के चित्र के समक्ष नौ बत्तियों का घी का दीपक जलाए¡। उसी दिन धन लाभ होगा।
48॰ एक नारियल पर कामिया सिन्दूर, मोली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएँ। धन लाभ होगा।
49॰ पीपल के वृक्ष की जड़ में तेल का दीपक जला दें। फिर वापस घर आ जाएँ एवं पीछे मुड़कर न देखें। धन लाभ होगा।
50॰ प्रात:काल पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएँ तथा अपनी सफलता की मनोकामना करें और घर से बाहर शुद्ध केसर से स्वस्तिक बनाकर उस पर पीले पुष्प और अक्षत चढ़ाए¡। घर से बाहर निकलते समय दाहिना पाँव पहले बाहर निकालें।
51॰ एक हंडिया में सवा किलो हरी साबुत मूंग की दाल, दूसरी में सवा किलो डलिया वाला नमक भर दें। यह दोनों हंडिया घर में कहीं रख दें। यह क्रिया बुधवार को करें। घर में धन आना शुरू हो जाएगा।
52॰ प्रत्येक मंगलवार को 11 पीपल के पत्ते लें। उनको गंगाजल से अच्छी तरह धोकर लाल चन्दन से हर पत्ते पर 7 बार राम लिखें। इसके बाद हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएं तथा वहां प्रसाद बाटें और इस मंत्र का जाप जितना कर सकते हो करें। `जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरू देव की नांई´ 7 मंगलवार लगातार जप करें। प्रयोग गोपनीय रखें। अवश्य लाभ होगा।
53॰ अगर नौकरी में तरक्की चाहते हैं, तो 7 तरह का अनाज चिड़ियों को डालें।
54॰ ऋग्वेद (4/32/20-21) का प्रसिद्ध मन्त्र इस प्रकार है -`ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।।´ (हे लक्ष्मीपते ! आप दानी हैं, साधारण दानदाता ही नहीं बहुत बड़े दानी हैं। आप्तजनों से सुना है कि संसारभर से निराश होकर जो याचक आपसे प्रार्थना करता है उसकी पुकार सुनकर उसे आप आर्थिक कष्टों से मुक्त कर देते हैं - उसकी झोली भर देते हैं। हे भगवान मुझे इस अर्थ संकट से मुक्त कर दो।)
51॰ निम्न मन्त्र को शुभमुहूर्त्त में प्रारम्भ करें। प्रतिदिन नियमपूर्वक 5 माला श्रद्धा से भगवान् श्रीकृष्ण का ध्यान करके, जप करता रहे -“ॐ क्लीं नन्दादि गोकुलत्राता दाता दारिद्र्यभंजन।सर्वमंगलदाता च सर्वकाम प्रदायक:। श्रीकृष्णाय नम:।।´´
52॰ भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष भरणी नक्षत्र के दिन चार घड़ों में पानी भरकर किसी एकान्त कमरे में रख दें। अगले दिन जिस घड़े का पानी कुछ कम हो उसे अन्न से भरकर प्रतिदिन विधिवत पूजन करते रहें। शेष घड़ों के पानी को घर, आँगन, खेत आदि में छिड़क दें। अन्नपूर्णा देवी सदैव प्रसन्न रहेगीं।
53॰ किसी शुभ कार्य के जाने से पहले -रविवार को पान का पत्ता साथ रखकर जायें।सोमवार को दर्पण में अपना चेहरा देखकर जायें।मंगलवार को मिष्ठान खाकर जायें।बुधवार को हरे धनिये के पत्ते खाकर जायें।गुरूवार को सरसों के कुछ दाने मुख में डालकर जायें।शुक्रवार को दही खाकर जायें।शनिवार को अदरक और घी खाकर जाना चाहिये।
54 किसी भी शनिवार की शाम को माह की दाल के दाने लें। उसपर थोड़ी सी दही और सिन्दूर लगाकर पीपल के वृक्ष के नीचे रख दें और बिना मुड़कर देखे वापिस आ जायें। सात शनिवार लगातार करने से आर्थिक समृद्धि तथा खुशहाली बनी रहेगी।

·                     गृह बाधा की शांति के लिए पश्चिमाभिमुख होकर क्क नमः शिवाय मंत्र का २१ बार या २१ माला श्रद्धापूर्वक जप करें।

·                      

·                     आर्थिक परेशानियों से मुक्ति के लिए गणपति की नियमित आराधना करें। इसके अलावा श्वेत गुजा (चिरमी) को एक शीशी में गंगाजल में डाल कर प्रतिदिन श्री सूक्त का पाठ करें। बुधवार को विशेष रूप से प्रसाद चढ़ाकर पूजा करें।

·                      

·                     विवाह बाधा दूर करने के लिए कन्या को चाहिए कि वह बृहस्पतिवार को व्रत रखे और बृहस्पति की मंत्र के साथ पूजा करे। इसके अतिरिक्त पुखराज या सुनैला धारण करे। छोटे बच्चे को बृहस्पतिवार को पीले वस्त्र दान करे। लड़के को चाहिए कि वह हीरा या अमेरिकन जर्कन धारण करे और छोटी बच्ची को शुक्रवार को श्वेत वस्त्र दान करे।

 

बाधा निवारण के प्रमुख स्थल

·                     बाला जी (मेहंदीपुर राजस्थान) - भूत प्रेत बाधा निवारण

·                     हुसैन टेकरी (राजस्थान) - भूत प्रेत बाधा निवारण

·                     पीतांबरा शक्ति पीठ (तिया) - शत्रु विनाश

·                     कात्यायनी शक्ति पीठ (वृंदावन) - कुंआरी कन्याओं के शीघ्र विवाह के लिए

·                     शुचींद्रम शक्तिपीठ (कन्याकुमारी) - कुंआरी कन्याओं के शीघ्र विवाह के लिए

·                     गुह्येश्वरी देवी (नेपाल) - रोग मुक्ति

·                     महाकालेश्वर (उज्जै न) - प्राण रक्षा हेतु

 

 

कुछ उपयोगी टोटके

छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत्‌
जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय
स्तंभ में उपयोगी टोटकों की विधिवत्‌ जानकारी दी जा रही है...

 

छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत्‌  जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय स्तंभ में उपयोगी टोटकों की विधिवत्‌ जानकारी दी जा रही है..

·                     सांप के विष से बचाव हेतु :

·                     चैत्र मास की मेष संक्राति के दिन मसूर की दाल एवं नीम की पत्तियां खाएं। सर्प काट भी लेगा तो विष नहीं चढ़ेगा।  इसके अतिरिक्त प्रतिदिन प्रातः काल नीम की पत्तियां चबाकर पानी पीएं और घूमने जाएं, शरीर में विष रोधी क्षमता बढ़ेगी।

·                     घर में स्थिर लक्ष्मी के वास के लिए : चक्की पर गेहूं पिसवाने जाते समय तुलसी के ग्यारह पत्ते गेहूं में डाल दें। एक लाल थैली में केसर के २ पत्ते और थोड़े से गेहूं डालकर मंदिर में रखकर फिर इन्हें भी पिसवाने वाले गेंहू में मिला दें, धन में बरकत होगी और घर में स्थ्रि लक्ष्मी का वास होगा। आटा केवल सोमवार या शनिवार को पिसवाएं।

·                     पैतृक संपत्ति की प्राप्ति के लिए : 

·                     घर में पूर्वजों के गड़े हुए धन की प्राप्ति हेतु किसी सोमवार को २१ श्वेत चितकवरी कौड़ियों को अच्छी तरह पीस लें और चूर्ण को उस स्थान पर रखें, जहां धन गड़े होने का अनुमान हो। धन गड़ा हुआ होगा, तो मिल जाएगा।

·                     सगे संबंधियों को दिया गया धन वापस प्राप्त करने हेतु :

·                     किसी सगे संबंधी को धन दिया हो और वह वापस नहीं कर रहा हो, तो ऊपर बताई गई विधि की भांति २१ श्वेत चितकबरी कौड़ियों को पीस कर चूर्ण उसके दरबाजे के आगे बिखेर दें। यह क्रिया ४३ दिनों तक करते रहें, वह व्यक्ति आपका धन वापस कर देगा।

·                      

·                     व्यापार व कारोबार में वृद्धि के लिए

·                     एक नीबू लेकर उस पर चार लौंग गाड़ दें और उसे हाथ में रखकर निम्नलिखित मंत्र का २१ बार जप करें। जप के बाद नीबू को अपनी जेब में रख कर जिनसे कार्य होना हो, उनसे जाकर मिलें।

    क्क श्री हनुमते नमः 

    इसके अतिरिक्त शनिवार को पीपल का एक पत्ता गंगा जल से धोकर हाथ में रख लें और गायत्री मंत्र का २१ बार जप करें। फिर उस पत्ते को धूप देकर अपने कैश बॉक्स में रख दें। यह क्रिया प्रत्येक शनिवार को करें और पत्ता बदल कर पहले के पत्ते को पीपल की जड़ में में रख दें। यह क्रिया निष्ठापूर्वक करें, कारोबार में उन्नति होगी।

परिवार में शांति बनाए रखने के लिए :

 बुधवार को मिट्टी के बने एक शेर को उसके गले में लाल चुन्नी बांधकर और लाल टीका लगाकर माता के मंदिर में रखें और माता को अपने परिवार की सभी समस्याएं बताकर उनसे शांति बनाए रखने की विनती करें। यह क्रिया निष्ठापूर्वक करें, परिवार में शांति कायम होगी।

 

 

 

 

1.       आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए :

यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें !

2.       घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए :

इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें ! या

एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें !

3.       परेशानी से मुक्ति के लिए :

आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें ! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय ! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें ! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी !

4.      कुंवारी कन्या के विवाह हेतु :

 

5.       व्यापार बढाने के लिए :

१.       शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें ! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही !

२.      पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें !

.      शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें ! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें ! उसके तीन हिस्से कर लें ! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें ! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें ! यह प्रयोग 40 दिन तक करें ! कारोबार में लाभ होगा !

6.       लगातार बुखार आने पर :   

१.       यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा !

२.      इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें !  

३.      यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा !

7.       नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिए :

पांच ग्राम डली वाला सुरमा लें ! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें ! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें ! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो ! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए !

8.        कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो :

यदि उपरोक्त स्थिति का सामना हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें ! अवश्य लाभ होगा !

9.       मुकदमें में विजय पाने के लिए :

यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट/कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें ! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है ! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा ! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा !

10.       धन के ठहराव के लिए :

आप जो भी धन मेहनत से कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो रहा हो अर्थात घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें को आपके घर में कोई नल लीक न करता हो ! अर्थात पानी टप–टप टपकता न हो ! और आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिये ! वरना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की सम्भावना रह्ती है !

12.       बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए :

१.       एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !

२.      प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा !

 

14.       प्रेम विवाह में सफल होने के लिए :

यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो :

शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !

15.       नौकर न टिके या परेशान करे तो :

हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें ! ऐसा आप चार मंगलवार करें !      

16.       बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो :

हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें ! 

17.       यदि आपको सही नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही हो तो :

१.       कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए !

२.      काला कम्बल किसी गरीब को दान दें !

३.      6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों !

18.       अगर आपका प्रमोशन नहीं हो रहा तो :

१.       गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें !

२.      हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें !

     नोट :

 

1. लाल किताब के सभी उपाय दिन में ही करने चाहिए ! अर्थात सूरज उगने के बाद व सूरज डूबने से पहले !

2. सच्चाई व शुद्ध भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए !
3. किसी भी उपाय के बीच मांस, मदिरा, झूठे वचन, परस्त्री गमन की विशेष मनाही है !

 

  4. सभी उपाय पूरे विश्वास व श्रद्धा से करें, लाभ अवश्य होगा !

5. एक दिन में एक ही उपाय करना चाहिए ! यदि एक से ज्यादा उपाय करने हों तो छोटा उपाय पहले करें !    एक उपाय के दौरान दूसरे उपाय का कोई सामान भी घर में न रखें !

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ऊपरी हवा पहचान और निदान

प्रायः सभी धर्मग्रंथों में ऊपरी हवाओं, नजर दोषों आदि का उल्लेख है। कुछ ग्रंथों में इन्हें बुरी आत्मा कहा गया है तो कुछ अन्य में भूत-प्रेत और जिन्न।

यहां ज्योतिष के आधार पर नजर दोष का विश्लेषण प्रस्तुत है।

ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार गुरु पितृदोष, शनि यमदोष, चंद्र व शुक्र जल देवी दोष, राहु सर्प व प्रेत दोष, मंगल शाकिनी दोष, सूर्य देव दोष एवं बुध कुल देवता दोष का कारक होता है। राहु, शनि व केतु ऊपरी हवाओं के कारक ग्रह हैं। जब किसी व्यक्ति के लग्न (शरीर), गुरु (ज्ञान), त्रिकोण (धर्म भाव) तथा द्विस्वभाव राशियों पर पाप ग्रहों का प्रभाव होता है, तो उस पर ऊपरी हवा की संभावना होती है।

लक्षण

नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति का शरीर कंपकंपाता रहता है। वह अक्सर ज्वर, मिरगी आदि से ग्रस्त रहता है।

कब और किन स्थितियों में डालती हैं ऊपरी हवाएं किसी व्यक्ति पर अपना प्रभाव?

जब कोई व्यक्ति दूध पीकर या कोई सफेद मिठाई खाकर किसी चौराहे पर जाता है, तब ऊपरी हवाएं उस पर अपना प्रभाव डालती हैं। गंदी जगहों पर इन हवाओं का वास होता है, इसीलिए ऐसी जगहों पर जाने वाले लोगों को ये हवाएं अपने प्रभाव में ले लेती हैं। इन हवाओं का प्रभाव रजस्वला स्त्रियों पर भी पड़ता है। कुएं, बावड़ी आदि पर भी इनका वास होता है। विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों के अवसर पर ये हवाएं सक्रिय होती हैं। इसके अतिरिक्त रात और दिन के १२ बजे दरवाजे की चौखट पर इनका प्रभाव होता है।

दूध व सफेद मिठाई चंद्र के द्योतक हैं। चौराहा राहु का द्योतक है। चंद्र राहु का शत्रु है। अतः जब कोई व्यक्ति उक्त चीजों का सेवन कर चौराहे पर जाता है, तो उस पर ऊपरी हवाओं के प्रभाव की संभावना रहती है।

कोई स्त्री जब रजस्वला होती है, तब उसका चंद्र व मंगल दोनों दुर्बल हो जाते हैं। ये दोनों राहु व शनि के शत्रु हैं। रजस्वलावस्था में स्त्री अशुद्ध होती है और अशुद्धता राहु की द्योतक है। ऐसे में उस स्त्री पर ऊपरी हवाओं के प्रकोप की संभावना रहती है।

कुएं एवं बावड़ी का अर्थ होता है जल स्थान और चंद्र जल स्थान का कारक है। चंद्र राहु का शत्रु है, इसीलिए ऐसे स्थानों पर ऊपरी हवाओं का प्रभाव होता है।

जब किसी व्यक्ति की कुंडली के किसी भाव विशेष पर सूर्य, गुरु, चंद्र व मंगल का प्रभाव होता है, तब उसके घर विवाह व मांगलिक कार्य के अवसर आते हैं। ये सभी ग्रह शनि व राहु के शत्रु हैं, अतः मांगलिक अवसरों पर ऊपरी हवाएं व्यक्ति को परेशान कर सकती हैं।

दिन व रात के १२ बजे सूर्य व चंद्र अपने पूर्ण बल की अवस्था में होते हैं। शनि व राहु इनके शत्रु हैं, अतः इन्हें प्रभावित करते हैं। दरवाजे की चौखट राहु की द्योतक है। अतः जब राहु क्षेत्र में चंद्र या सूर्य को बल मिलता है, तो ऊपरी हवा सक्रिय होने की संभावना प्रबल होती है।

मनुष्य की दायीं आंख पर सूर्य का और बायीं पर चंद्र का नियंत्रण होता है। इसलिए ऊपरी हवाओं का प्रभाव सबसे पहले आंखों पर ही पड़ता है।

यहां ऊपरी हवाओं से संबद्ध ग्रहों, भावों आदि का विश्लेषण प्रस्तुत है।

राहु-केतु : जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, शनिवत राहु ऊपरी हवाओं का कारक है। यह प्रेत बाधा का सबसे प्रमुख कारक है। इस ग्रह का प्रभाव जब भी मन, शरीर, ज्ञान, धर्म, आत्मा आदि के भावों पर होता है, तो ऊपरी हवाएं सक्रिय होती हैं।

शनि : इसे भी राहु के समान माना गया है। यह भी उक्त भावों से संबंध बनाकर भूत-प्रेत पीड़ा देता है।

चंद्र : मन पर जब पाप ग्रहों राहु और शनि का दूषित प्रभाव होता है और अशुभ भाव स्थित चंद्र बलहीन होता है, तब व्यक्ति भूत-प्रेत पीड़ा से ग्रस्त होता है।

गुरु : गुरु सात्विक ग्रह है। शनि, राहु या केतु से संबंध होने पर यह दुर्बल हो जाता है। इसकी दुर्बल स्थिति में ऊपरी हवाएं जातक पर अपना प्रभाव डालती हैं।

लग्न : यह जातक के शरीर का प्रतिनिधित्व करता है। इसका संबंध ऊपरी हवाओं के कारक राहु, शनि या केतु से हो या इस पर मंगल का पाप प्रभाव प्रबल हो, तो व्यक्ति के ऊपरी हवाओं से ग्रस्त होने की संभावना बनती है।

पंचम : पंचम भाव से पूर्व जन्म के संचित कर्मों का विचार किया जाता है। इस भाव पर जब ऊपरी हवाओं के कारक पाप ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, तो इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति के पूर्व जन्म के अच्छे कर्मों में कमी है। अच्छे कर्म अल्प हों, तो प्रेत बाधा योग बनता है।

अष्टम : इस भाव को गूढ़ विद्याओं व आयु तथा मृत्यु का भाव भी कहते हैं। इसमें चंद्र और पापग्रह या ऊपरी हवाओं के कारक ग्रह का संबंध प्रेत बाधा को जन्म देता है।

नवम : यह धर्म भाव है। पूर्व जन्म में पुण्य कर्मों में कमी रही हो, तो यह भाव दुर्बल होता है।

राशियां : जन्म कुंडली में द्विस्वभाव राशियों मिथुन, कन्या और मीन पर वायु तत्व ग्रहों का प्रभाव हो, तो प्रे्रत बाधा होती है।

वार : शनिवार, मंगलवार, रविवार को प्रेत बाधा की संभावनाएं प्रबल होती हैं।

तिथि : रिक्ता तिथि एवं अमावस्या प्रेत बाधा को जन्म देती है।

नक्षत्र : वायु संज्ञक नक्षत्र प्रेत बाधा के कारक होते हैं।

योग : विष्कुंभ, व्याघात, ऐंद्र, व्यतिपात, शूल आदि योग प्रेत बाधा को जन्म देते हैं।

करण : विष्टि, किस्तुन और नाग करणों के कारण व्यक्ति प्रेत बाधा से ग्रस्त होता है।

दशाएं : मुख्यतः शनि, राहु, अष्टमेश व राहु तथा केतु से पूर्णतः प्रभावित ग्रहों की दशांतर्दशा में व्यक्ति के भूत-प्रेत बाधाओं से ग्रस्त होने की संभावना रहती है।

युति

किसी स्त्री के सप्तम भाव में शनि, मंगल और राहु या केतु की युति हो, तो उसके पिशाच पीड़ा से ग्रस्त होने की संभावना रहती है।

गुरु नीच राशि अथवा नीच राशि के नवांश में हो, या राहु से युत हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो, तो जातक की चांडाल प्रवृत्ति होती है।

पंचम भाव में शनि का संबंध बने तो व्यक्ति प्रेत एवं क्षुद्र देवियों की भक्ति करता है।

 

ऊपरी हवाओं के कुछ अन्य मुख्य ज्योतिषीय योग

  • यदि लग्न, पंचम, षष्ठ, अष्टम या नवम भाव पर राहु, केतु, शनि, मंगल, क्षीण चंद्र आदि का प्रभाव हो, तो जातक के ऊपरी हवाओं से ग्रस्त होने की संभावना रहती है। यदि उक्त
     ग्रहों का परस्पर संबंध हो, तो जातक प्रेत आदि से पीड़ित हो सकता है।
  • यदि पंचम भाव में सूर्य और शनि की युति हो, सप्तम में क्षीण चंद्र हो तथा द्वादश में गुरु हो, तो इस स्थिति में भी व्यक्ति प्रेत बाधा का शिकार होता है।
  • यदि लग्न पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि हो, लग्न निर्बल हो, लग्नेश पाप स्थान में हो अथवा राहु या केतु से युत हो, तो जातक जादू-टोने से पीड़ित होता है।
  • लग्न में राहु के साथ चंद्र हो तथा त्रिकोण में मंगल, शनि अथवा कोई अन्य क्रूर ग्रह हो, तो जातक भूत-प्रेत आदि से पीड़ित होता है।
  • यदि षष्ठेश लग्न में हो, लग्न निर्बल हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक जादू-टोने से पीड़ित होता है। यदि लग्न पर किसी अन्य शुभ ग्रह की दृष्टि न हो, तो जादू-टोने से पीड़ित होने की संभावना प्रबल होती है। षष्ठेश के सप्तम या दशम में स्थित होने पर भी जातक जादू-टोने से पीड़ित हो सकता है।
  • यदि लग्न में राहु, पंचम में शनि तथा अष्टम में गुरु हो, तो जातक प्रेत शाप से पीड़ित होता है।

ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्ति के सरल         उपाय

ऊपरी हवाओं से मुक्ति हेतु शास्त्रों में अनेक उपाय बताए गए हैं। अथर्ववेद में इस हेतु कई मंत्रों व स्तुतियों का उल्लेख है। आयुर्वेद में भी इन हवाओं से मुक्ति के उपायों का विस्तार से वर्णन किया गया है। यहां कुछ प्रमुख सरल एवं प्रभावशाली उपायों का विवरण प्रस्तुत है।

·         ऊपरी हवाओं से मुक्ति हेतु हनुमान चालीसा का पाठ और गायत्री का जप तथा हवन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अग्नि तथा लाल मिर्ची जलानी चाहिए।

  • रोज सूर्यास्त के समय एक साफ-सुथरे बर्तन में गाय का आधा किलो कच्चा दूध लेकर उसमें शुद्ध शहद की नौ बूंदें मिला लें। फिर स्नान करके, शुद्ध वस्त्र पहनकर मकान
    की छत से नीचे तक प्रत्येक कमरे, जीने, गैलरी आदि में उस दूध के छींटे देते हुए द्वार तक आएं और बचे हुए दूध को मुख्य द्वार के बाहर गिरा दें। क्रिया के दौरान इष्टदेव का स्मरण करते रहें। यह क्रिया इक्कीस दिन तक नियमित रूप से करें, घर पर प्रभावी ऊपरी हवाएं दूर हो जाएंगी।
  • रविवार को बांह पर काले धतूरे की जड़ बांधें, ऊपरी हवाओं से मुक्ति मिलेगी।
  • लहसुन के रस में हींग घोलकर आंख में डालने या सुंघाने से पीड़ित व्यक्ति को ऊपरी हवाओं से मुक्ति मिल जाती है।
  • ऊपरी बाधाओं से मुक्ति हेतु निम्नोक्त मंत्र का यथासंभव जप करना चाहिए।
  • " ओम नमो भगवते रुद्राय नमः कोशेश्वस्य नमो ज्योति पंतगाय नमो रुद्राय नमः सिद्धि स्वाहा।''
  • घर के मुख्य द्वार के समीप श्वेतार्क का पौधा लगाएं, घर ऊपरी हवाओं से मुक्त रहेगा।
  • उपले या लकड़ी के कोयले जलाकर उसमें धूनी की विशिष्ट वस्तुएं डालें और उससे उत्पन्न होने वाला धुआं पीड़ित व्यक्त्ि को सुंघाएं। यह क्रिया किसी ऐसे व्यक्ति से करवाएं जो अनुभवी हो और जिसमें पर्याप्त आत्मबल हो।
  • प्रातः काल बीज मंत्र ÷क्लीं' का उच्चारण करते हुए काली मिर्च के नौ दाने सिर पर से घुमाकर दक्षिण दिशा की ओर फेंक दें, ऊपरी बला दूर हो जाएगी।
  • रविवार को स्नानादि से निवृत्त होकर काले कपड़े की छोटी थैली में तुलसी के आठ पत्ते, आठ काली मिर्च और सहदेई की जड़ बांधकर गले में धारण करें, नजर दोष बाधा से मुक्ति मिलेगी।
  • निम्नोक्त मंत्र का १०८ बार जप करके सरसों का तेल अभिमंत्रित कर लें और उससे पीड़ित व्यक्ति के शरीर पर मालिश करें, व्यकित पीड़ामुक्त हो जाएगा।
  • मंत्र : ओम नमो काली कपाला देहि देहि स्वाहा।
  • ऊपरी हवाओं के शक्तिषाली होने की स्थिति में शाबर मंत्रों का जप एवं प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग करने के पूर्व इन मंत्रों का दीपावली की रात को अथवा होलिका दहन की रात को जलती हुई होली के सामने या फिर श्मषान में १०८ बार जप कर इन्हें सिद्ध कर लेना चाहिए। यहां यह उल्लेख कर देना आवष्यक है कि इन्हें सिद्ध करने के इच्छुक साधकों में पर्याप्त आत्मबल होना चाहिए, अन्यथा हानि हो सकती है।
  • निम्न मंत्र से थोड़ा-सा जीरा ७ बार अभिमंत्रित कर रोगी के शरीर से स्पर्श कराएं और उसे अग्नि में डाल दें। रोगी को इस स्थिति में बैठाना चाहिए कि उसका धूंआ उसके मुख के सामने आये। इस प्रयोग से भूत-प्रेत बाधा की निवृत्ति होती है।
  •              मंत्र :
  • जीरा जीरा महाजीरा जिरिया चलाय। जिरिया की शक्ति से फलानी चलि जाय॥ जीये तो रमटले मोहे तो मशान टले। हमरे जीरा मंत्र से अमुख अंग भूत चले॥ जाय हुक्म पाडुआ पीर की दोहाई॥
  • एक मुट्ठी धूल को निम्नोक्त मंत्र से ३ बार अभिमंत्रित करें और नजर दोष से ग्रस्त व्यक्ति पर फेंकें, व्यक्ति को दोष से मुक्ति मिलेगी।
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  •                 मंत्र :
  • तह कुठठ इलाही का बान। कूडूम की पत्ती चिरावन। भाग भाग अमुक अंक से भूत। मारुं धुलावन कृष्ण वरपूत। आज्ञा कामरु कामाख्या। हारि दासीचण्डदोहाई।
  • थोड़ी सी हल्दी को ३ बार निम्नलिखित मंत्र से अभिमंत्रित करके अग्नि में इस तरह छोड़ें कि उसका धुआं रोगी के मुख की ओर जाए। इसे हल्दी बाण मंत्र कहते हैं।
  • हल्दी गीरी बाण बाण को लिया हाथ उठाय। हल्दी बाण से नीलगिरी पहाड़ थहराय॥ यह सब देख बोलत बीर हनुमान। डाइन योगिनी भूत प्रेत मुंड काटौ तान॥ आज्ञा कामरु कामाक्षा माई। आज्ञा हाड़ि की चंडी की दोहाई॥
  • जौ, तिल, सफेद सरसों, गेहूं, चावल, मूंग, चना, कुष, शमी, आम्र, डुंबरक पत्ते और अषोक, धतूरे, दूर्वा, आक व ओगां की जड़ को मिला लें और उसमें दूध, घी, मधु और गोमूत्र मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें। फिर संध्या काल में हवन करें और निम्न मंत्रों का १०८ बार जप कर इस मिश्रण से १०८ आहुतियां दें।
  • मंत्र : ओम नमः भवे भास्कराय आस्माक अमुक सर्व ग्रहणं पीड़ा नाशनं कु रु-कुरु स्वाहा

 

 

 

 

      अपषकुन क्या है?

कुछ लक्षणों को देखते ही व्यक्ति के मन में आषंका उत्पन्न हो जाती है कि उसका कार्य पूर्ण नहीं होगा। कार्य की अपूर्णता को दर्षाने वाले ऐसे ही कुछ लक्षणों को हम अपषकुन मान लेते हैं।

अपशकुनों के बारे में हमारे यहां काफी कुछ लिखा गया है, और उधर पष्चिम में सिग्मंड फ्रॉयड समेत अनेक लेखकों-मनोवैज्ञानिकों ने भी काफी लिखा है। यहां पाठकों के लाभार्थ घरेलू उपयोग की कुछ वस्तुओं, विभिन्न जीव-जंतुओं, पक्षियों आदि से जुड़े कुछ अपषकुनों का विवरण प्रस्तुत है।

       

       झाड़ू का अपषकुन

  • नए घर में पुराना झाड़ू ले जाना अषुभ होता है।
  • उलटा झाडू रखना अपषकुन माना जाता है।
  • अंधेरा होने के बाद घर में झाड़ू लगाना अषुभ होता है। इससे घर में दरिद्रता आती है।
  • झाड़ू पर पैर रखना अपषकुन माना जाता है। इसका अर्थ घर की लक्ष्मी को ठोकर मारना है।
  • यदि कोई छोटा बच्चा अचानक झाड़+ू लगाने लगे तो अनचाहे मेहमान घर में आते हैं।
  • किसी के बाहर जाते ही तुरंत झाड़ू लगाना अषुभ होता है।

                दूध का अपषकुन

  • दूध का बिखर जाना अषुभ होता है।
  • बच्चों का दूध पीते ही घर से बाहर जाना अपषकुन माना जाता है।
  • स्वप्न में दूध दिखाई देना अशुभ माना जाता है। इस स्वप्न से स्त्री संतानवती होती है।

          

         पशुओं का अपषकुन

  • किसी कार्य या यात्रा पर जाते समय कुत्ता बैठा हुआ हो और वह आप को देख कर चौंके, तो विन हो।
  • किसी कार्य पर जाते समय घर से बाहर कुत्ता शरीर खुजलाता हुआ दिखाई दे तो कार्य में असफलता मिलेगी या बाधा उपस्थित होगी।
  • यदि आपका पालतू कुत्ता आप के वाहन के भीतर बार-बार भौंके तो कोई अनहोनी घटना अथवा वाहन दुर्घटना हो सकती है।
  • यदि कीचड़ से सना और कानों को फड़फड़ाता हुआ दिखाई दे तो यह संकट उत्पन्न होने का संकेत है।
  • आपस में लड़ते हुए कुत्ते दिख जाएं तो व्यक्ति का किसी से झगड़ा हो सकता है।
  • शाम के समय एक से अधिक कुत्ते पूर्व की ओर अभिमुख होकर क्रंदन करें तो उस नगर या गांव में भयंकर संकट उपस्थित होता है।
  • कुत्ता मकान की दीवार खोदे तो चोर भय होता है।
  • यदि कुत्ता घर के व्यक्ति से लिपटे अथवा अकारण भौंके तो बंधन का भय उत्पन्न करता है।
  • चारपाई के ऊपर चढ़ कर अकारण भौंके तो चारपाई के स्वामी को बाधाओं तथा संकटों का सामना करना पड़ता है।
  • कुत्ते का जलती हुई लकड़ी लेकर सामने आना मृत्यु भय अथवा भयानक कष्ट का सूचक है।
  • पषुओं के बांधने के स्थान को खोदे तो पषु चोरी होने का योग बने।
  • कहीं जाते समय कुत्ता श्मषान में अथवा पत्थर पर पेषाब करता दिखे तो यात्रा कष्टमय हो सकती है, इसलिए यात्रा रद्द कर देनी चाहिए। गृहस्वामी के यात्रा पर जाते समय यदि कुत्ता उससे लाड़ करे तो यात्रा अषुभ हो सकती है।
  • बिल्ली दूध पी जाए तो अपषकुन होता है।
  • यदि काली बिल्ली रास्ता काट जाए तो अपषकुन होता है। व्यक्ति का काम नहीं बनता, उसे कुछ कदम पीछे हटकर आगे बढ़ना चाहिए।
  • यदि सोते समय अचानक बिल्ली शरीर पर गिर पड़े तो अपषकुन होता है।
  • बिल्ली का रोना, लड़ना व छींकना भी अपषकुन है।
  • जाते समय बिल्लियां आपस में लड़ाई करती मिलें तथा घुर-घुर शब्द कर रही हों तो यह किसी अपषकुन का संकेत है। जाते समय बिल्ली रास्ता काट दे तो यात्रा पर नहीं जाना चाहिए।
  • गाएं अभक्ष्य भक्षण करें और अपने बछड़े को भी स्नेह करना बंद कर दें तो ऐसे घर में गर्भक्षय की आषंका रहती है। पैरों से भूमि खोदने वाली और दीन-हीन अथवा भयभीत दिखने वाली गाएं घर में भय की द्योतक होती हैं।
  • गाय जाते समय पीछे बोलती सुनाई दे तो यात्रा में क्लेषकारी होती है।
  • घोड़ा दायां पैर पसारता दिखे तो क्लेष होता है।
  • ऊंट बाईं तरफ बोलता हो तो क्लेषकारी माना जाता है।
  • हाथी बाएं पैर से धरती खोदता या अकेला खड़ा मिले तो उस तरफ यात्रा नहीं करनी चाहिए। ऐसे में यात्रा करने पर प्राण घातक हमला होने की संभावना रहती है।
  • प्रातः काल बाईं तरफ यात्रा पर जाते समय कोई हिरण दिखे और वह माथा न हिलाए, मूत्र और मल करे अथवा छींके तो यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • जाते समय पीठ पीछे या सामने गधा बोले तो बाहर न जाएं।

         पक्षियों का अपषकुन

सारस बाईं तरफ मिले तो अषुभ फल की प्राप्ति होती है।

सूखे पेड़ या सूखे पहाड़ पर तोता बोलता नजर आए तो भय तथा सम्मुख बोलता दिखाई दे तो बंधन दोष होता है।

मैना सम्मुख बोले तो कलह और दाईं तरफ बोले तो अषुभ हो।

बत्तख जमीन पर बाईं तरफ बोलती हो तो अषुभ फल मिले।

बगुला भयभीत होकर उड़ता दिखाई दे तो यात्रा में भय उत्पन्न हो।

यात्रा के समय चिड़ियों का झुंड भयभीत होकर उड़ता दिखाई दे तो भय उत्पन्न हो।

घुग्घू बाईं तरफ बोलता हो तो भय उत्पन्न हो। अगर पीठ पीछे या पिछवाड़े बोलता हो तो भय और अधिक बोलता हो तो शत्रु ज्यादा होते हैं। धरती पर बोलता दिखाई दे तो स्त्री की और अगर तीन दिन तक किसी के घर के ऊपर बोलता दिखाई दे तो घर के किसी सदस्य की मृत्यु होती है।

कबूतर दाईं तरफ मिले तो भाई अथवा परिजनों को कष्ट होता है।

लड़ाई करता मोर दाईं तरफ शरीर पर आकर गिरे तो अषुभ माना जाता है।

लड़ाई करता मोर दाईं तरफ शरीर पर आकर गिरे तो अषुभ माना जाता है।

       अपषकुनों से मुक्ति तथा बचाव
               के उपाय

विभिन्न अपशकुनों से ग्रस्त लोगों को
निम्नलिखित उपाय करने चाहिए।

यदि काले पक्षी, कौवा, चमगादड़
आदि के अपषकुन से प्रभावित हों तो अपने इष्टदेव का ध्यान करें या अपनी राषि के अधिपति देवता के मंत्र का जप करें तथा धर्मस्थल पर तिल के तेल का दान करें।

अपषकुनों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए धर्म स्थान पर प्रसाद चढ़ाकर बांट दें।

छींक के दुष्प्रभाव से बचने के लिए निम्नोक्त मंत्र का जप करें तथा चुटकी बजाएं।

क्क राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम जपेत्‌ तुल्यम्‌ राम नाम वरानने॥

अषुभ स्वप्न के दुष्प्रभाव को समाप्त करने के लिए महामद्यमृत्युंजय के निम्नलिखित मंत्र का जप करें।

क्क ह्रौं जूं सः क्क भूर्भुवः स्वः क्क त्रयम्बकम्‌ यजामहे सुगन्धिम्‌ पुच्च्िटवर्(नम्‌ उर्वारूकमिव बन्धनान्‌ मृत्योर्मुक्षीयमाऽमृतात क्क स्वः भुवः भूः क्क सः जूं ह्रौं॥क्क॥

श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ भी सभी अपषकुनों के प्रभाव को समाप्त करता है।

सर्प के कारण अषुभ स्थिति पैदा हो तो जय राजा जन्मेजय का जप २१ बार करें।

रात को निम्नोक्त मंत्र का ११ बार जप कर सोएं, सभी अनिष्टों से भुक्ति मिलेगी।

बंदे नव घनष्याम पीत कौषेय वाससम्‌।

सानन्दं सुंदरं शुद्धं श्री कृष्ण प्रकृते परम्‌॥

 

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